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दिल्ली, 17 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार सायं नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भेंट कर प्रदेश के सेब बागवानों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। मुख्यमंत्री ने सेब उत्पादन के पीक सीज़न (जुलाई से नवंबर) के दौरान सेब आयात पर प्रतिबंध लगाने तथा सेब पर आयात शुल्क बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का पुरजोर आग्रह किया, ताकि विदेशी सेब के आयात से हिमाचल प्रदेश के बागवानों को होने वाली हानि से बचाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 2.5 लाख किसान सेब उत्पादन से जुड़े हैं और राज्य के कुल फल उत्पादन में सेब का योगदान करीब 80 प्रतिशत है। सेब उत्पादन से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 4500 करोड़ रुपये की आय होती है। ऐसे में सेब आयात से बागवानों की आय और बाजार मूल्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिसे रोकने के लिए केंद्र सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रदेश के बागवानों ने उनके समक्ष अपनी समस्याएं रखी थीं, जिन्हें वे लगातार केंद्र सरकार के समक्ष उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस विषय को उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी रखा है और बागवानों के हित में शीघ्र उचित कार्रवाई का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री को अवगत करवाया कि पिछले दस वर्षों में सेब आयात में लगभग ढाई गुना वृद्धि हुई है और विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के कारण इसमें और बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड से सेब का आयात मुख्यतः अप्रैल से अगस्त के दौरान होता है, जिस पर वर्तमान में 25 प्रतिशत आयात शुल्क निर्धारित है, जबकि अन्य महीनों में 50 प्रतिशत शुल्क लागू रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का असर केवल सेब सीज़न तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे राज्य में कोल्ड स्टोरेज में रखे सेबों की कीमतों और ऑफ-सीज़न कारोबार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभाग सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी बैठक में उपस्थित रहे।
