न्यूज अपडेट्स
शिमला, 22 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला के संजौली हेलीपोर्ट से हेलीकॉप्टर सेवाओं का औपचारिक शुभारम्भ किया। इसके साथ ही संजौली हेलीपोर्ट से कुल्लू जिला के भुंतर हवाई अड्डा और किन्नौर जिला के रिकांगपिओ (आईटीबीपी हेलीपैड) के लिए रोजाना हेलीकॉप्टर उड़ानें शुरू हो गई हैं।
इसके अतिरिक्त चंडीगढ़ से संजौली हेलीपोर्ट के बीच सप्ताह में तीन दिन—सोमवार, शुक्रवार और शनिवार—हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन किया जाएगा। किराया संजौली से कुल्लू 3,500 रुपये प्रति यात्री, संजौली से रिकांगपिओ 4,000 रुपये प्रति यात्री तथा संजौली से चंडीगढ़ 3,169 रुपये प्रति यात्री निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शीघ्र ही संजौली–रामपुर–रिकांगपिओ और संजौली–मनाली (सासे हेलीपैड) के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिसके लिए डीजीसीए को प्रस्ताव भेजे गए हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह सेवाएं पर्यटन से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम जनता के लिए भी बेहद लाभकारी होंगी। यह लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जो अब पूरी हुई है। इन सेवाओं से यात्रियों का समय बचेगा और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।
उन्होंने कहा कि संजौली हेलीपोर्ट आईजीएमसी अस्पताल के निकट स्थित है, जिससे मेडिकल इमरजेंसी में भी यह सुविधा बेहद उपयोगी सिद्ध होगी। राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और हेलीकॉप्टर सेवाओं से प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार हर जिले के मुख्यालय और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट विकसित कर रही है। हमीरपुर के जसकोट, कांगड़ा के रक्कड़ और पालमपुर तथा चंबा में चार हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य अगले मार्च-अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। प्रत्येक हेलीपोर्ट पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे उच्च वर्ग के पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने लगभग एक हजार करोड़ रुपये ऐसी इमारतों पर खर्च किए, जो आज बेकार और खाली पड़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि संजौली हेलीपोर्ट का शिलान्यास 13 सितंबर, 2017 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था। इसका निर्माण लगभग 15.86 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। हालांकि 12 जनवरी, 2022 को हेलीपोर्ट का उद्घाटन हो गया था, लेकिन डीजीसीए की मंजूरी न मिलने के कारण सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। वर्तमान प्रदेश सरकार के प्रयासों से 7 अगस्त, 2025 को उड़ानों की अनुमति मिली, जिसके बाद आज सेवाएं शुरू की गईं।
