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नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और सबसे लंबे समय तक सूबे के डिप्टी सीएम रहने वाले गैर भाजपाई नेता अजित पवार का आज एक प्लेन हादसे में निधन हो गया। वे बारामती में एक जनसभा के लिए जा रहे थे जब यह हादसा हुआ। उनके अलावा विमान में पांच और लोग भी सवार थे, इस दुखद हादसे में कोई भी जिंदा नहीं बच सका। हादसे के बाद सामने आए वीडियो में पूरा प्लेन जलकर खाक हो गया है। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। महाराष्ट्र के लोग अपने नेता की मौत से गमगीन हैं। 20 साल की उम्र से राजनीति में एंट्री लेने वाले अजित पवार पांचवी बार सूबे के डिप्टी सीएम थे।
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में अपने दादा-दादी के घर हुआ था। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक और दिग्गज नेता शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार और आशाताई पवार के पुत्र थे। उनके पिता वी. शांताराम मुंबई के प्रसिद्ध राजकमल स्टूडियो में कार्यरत थे। पारिवारिक माहौल और राजनीतिक विरासत ने अजित पवार को कम उम्र में ही सार्वजनिक जीवन की ओर आकर्षित किया। उनका विवाह सुनेत्रा पवार से हुआ,जिनसे उनके दो बेटे हैं, जय और पार्थ पवार।
चाचा शरद पवार के प्रभाव और मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। संघर्ष और जमीनी राजनीति के दम पर अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के अहम चेहरे बने और उप मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे, हालांकि वे कभी सीएम न बन पाए। अपनी तेज-तर्रार शैली और साफ-गोई के कारण वे समर्थकों के बीच ‘दादा’ के नाम से खासे लोकप्रिय रहे।
शैक्षणिक जीवन की बात करें तो अजित पवार ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई देओली प्रवर से की। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र राज्य शिक्षा बोर्ड से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। फिर पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और परिवार की मदद के लिए काम करने लगे। अजित की औपचारिक रूप से पढ़ाई भले ही माध्यमिक स्तर तक सीमित रही हो, लेकिन राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक समझ ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया।
20 साल की उम्र में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अजित पवार के राजनैतिक जीवन की शुरुआत चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चल हुई। अजित ने 1982 में सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। राजनीति की उनकी शुरुआत सहकारिता क्षेत्र से हुई,जब वे एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड के लिए चुने गए। इसके बाद 1991 में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 वर्षों तक इस अहम पद पर बने रहे। सहकारिता क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें ग्रामीण राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया।
पहली बार 1991 में लड़ा चुनाव और संसद पहुंचे
अजित पवार ने 1991 में बारामती लोकसभा सीट से पहली बार संसद में प्रवेश किया। हालांकि बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी। फिर वह उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए और नवंबर 1992 से फरवरी 1993 तक कृषि और बिजली राज्य मंत्री रहे। वे बारामती विधानसभा क्षेत्र से अब तक सात बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। उनकी पहली जीत 1991 के उपचुनाव में हुई और इसके बाद उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार जीत दर्ज कर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखा।
