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HRTC में नियमों की धज्जियां, मुख्यालय से ही शुरू होता है अनदेखी का खेल, यहां जानें

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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 14 दिसंबर। (अनिल) हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) में बनाए गए नियमों को लागू करवाने में निगम के आला अधिकारी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सीधे HRTC के मुख्य कार्यालय तक पहुंच रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अधिकारी शून्य नजर आते हैं। एक-एक लाख रुपये तक वेतन लेने वाले अधिकारी अपने ही बनाए नियमों को लागू नहीं कर पा रहे हैं, जिससे निगम को घाटे से उबारने की उनकी क्षमता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायतें सरकार तक भी पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी तरह का ठोस हस्तक्षेप नहीं हो पाया है। ऐसे में यह धारणा बनती जा रही है कि सरकार को सब कुछ पता होने के बावजूद कार्रवाई के मूड में नहीं है। नतीजतन, भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, जबकि कथित रूप से भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी मौज करते दिखाई दे रहे हैं। 

वरिष्ठता के आधार पर तैनाती को लेकर भी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। कई बार निर्देश जारी होने और शिकायतें मुख्य कार्यालय तक पहुंचने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। जानकारी के मुताबिक HRTC बिलासपुर में कनिष्ठ चालक को सहायक चालक प्रभारी नियुक्त किया गया है, जबकि इस पद पर वरिष्ठ चालक की तैनाती होनी चाहिए थी। ऐसे ही अन्य पदों पर भी वरिष्ठ कर्मचारियों को दरकिनार कर कनिष्ठों को जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा, उम्र पूरी कर चुकी बसों का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है। नियमों के अनुसार बसें अधिकतम 9 लाख किलोमीटर तक चलने के लिए वैध मानी जाती हैं, लेकिन कई बसें 14 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं और अब भी पहाड़ी सड़कों पर दौड़ रही हैं। आपको बता दें कि जब इन जर्जर बसों के पार्ट टूटते हैं तो चालकों से डिपो स्तर पर कथित नाजायज रिकवरी की जाती है इससे न केवल कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।

नियमों के जानबूझकर पालन न होने के चलते कुछ कर्मचारियों को तानाशाही रवैये और मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि शिकायत करने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हाल ही में HRTC में अधिकारियों की संख्या कम करने की बात कह चुके हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि निगम को चलाने के लिए चालकों और परिचालकों की जरूरत है, न कि अफसरों की फौज। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में HRTC में बड़े प्रशासनिक बदलाव हो सकते हैं और कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी संभव है।

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