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हिमाचल : अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप, विभाग ने जारी किए नोटिस, 10 दिनों का दिया समय

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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 05 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक बार फिर अपने वादे के विपरित काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक तरफ जहां सदन में सरकारी भूमि पर बसे लोगों के हितों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ने की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्हीं सरकारी भूमि पर सालों से बसे लोगों को विभाग नोटिस थमा रहा है और 10 दिन के अंदर अवैध कब्जे खाली करने की चेतावनी दे दी है। विभाग द्वारा इस तरह के नोटिस जारी करने से सरकारी भूमि पर सालों से रह रहे लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। 

प्रदेश के राजस्व विभाग ने वन भूमि के अलावा सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों को 10 दिनों के भीतर कब्जा हटाने के नोटिस जारी किए हैं। मंडी, शिमला, रोहड़ू, चंबा और सिरमौर सहित कई क्षेत्रों में गुरुवार को नोटिस बड़े पैमाने पर पहुंचाए गए। नोटिस में साफ लिखा है कि तय समय में जमीन खाली नहीं की गई तो पुलिस और प्रशासन आकर अतिक्रमण हटाएगा और इसका पूरा खर्च कब्जाधारी से वसूला जाएगा।
 
बता दें कि दो दिन पहले ही सदन में जयराम ठाकुर के एक सवाल का जवाब देते हुए सीएम सुक्खू ने बताया था कि हिमाचल की सरकारी भूमि पर करीब 1.60 लोगों का कब्जा है, जिनमें कई परिवार दशकों से रह रहे हैं। इनमें से कुछ ने घर बनाए हैं तो कुछ लोग सरकारी भूमि पर खेती करते हैं। सीएम ने सदन में आश्वासन दिया था कि सरकार इन परिवारों को बेघर नहीं होने देगी और सुप्रीम कोर्ट में शीर्ष वकीलों के माध्यम से हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। लेकिन अब सुक्खू सरकार ने अपने ही दिए आश्वासनों को झुठलाते हुए सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। जिससे प्रभावित लोगों में जबरदस्त डर और गुस्सा फैल गया है।

सरकारी भूमि पर बसे मंडी जिला के एक व्यक्ति ने बताया कि 2 दिसंबर को वन विभाग के अधिकारी घर पहुंचे और नोटिस दिया। विभाग ने चेतावनी दी है कि 10 दिन में वह अपने अवैध कब्जे हटा लें, अन्यथा विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। बता दें कि जिन लोगों को नोटिस जारी हुए हैं वे वही लोग हैं जो वर्षों से सरकारी भूमि पर खेती कर रहे हैं या छोटे घर बनाकर रह रहे हैं। 

माकपा नेता संजय चौहान ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री विधानसभा में बड़ेण्बड़े दावे करते हैं कि किसी परिवार को बेघर नहीं किया जाएगाए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगीए लेकिन इसी बीच वन अधिकारी बेदखली की नोटिस लेकर लोगों के घर पहुंच रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर प्रदेश में सरकार चला कौन रहा है और निर्णय कौन ले रहा है। लोगों में यह सवाल खास तौर पर उठ रहा है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने को कहा हैए तो फिर अवैध कब्जों पर कार्रवाई की क्या जरूरत थी।

बता दें कि हिमाचल हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2025 को 23 साल पुरानी कब्जा नियमितीकरण नीति को रद्द कर दिया था और 28 फरवरी 2026 तक सभी अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए थे। यह वही नीति है जिसमें 2002 में भाजपा सरकार ने भू राजस्व अधिनियम में संशोधन कर धारा 163-A जोड़ी थी। इसके तहत अतिक्रमणकारियों को 5 से 20 बीघा तक जमीन देने का प्रावधान था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचाए जहां अभी सुनवाई जारी है और कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिससे सरकारी भूमि पर बसे लोगों में सुक्खू सरकार के प्रति गहरा रोष है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थेए बावजूद इसके सरकार उन्हें नोटिस थमा रही है।

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