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नई दिल्ली, 18 नवंबर। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को कड़ी फटकार लगाते हुए हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारी विमल नेगी की मौत की जांच कर रहे उसके कुछ अधिकारियों की क्षमता पर सवाल उठाए. शीर्ष अदालत ने उन्हें ‘पूरी तरह फर्जी अधिकारी’ बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी सेवा में रहने के लायक नहीं हैं. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ देशराज नाम के व्यक्ति की अग्रिम जमानत संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
पीठ ने कहा, “जांचकर्ता कौन है जो सवाल पूछ रहा है? यह बचकाना है. मैं इस जांचकर्ता पर टिप्पणी कर रहा हूं. अगर वह एक वरिष्ठ अधिकारी है, तो यह सीबीआई की छवि को बहुत खराब करता है. आपने इसी वजह से उसका तबादला कर दिया, कैसा सवाल है… क्या यही सवाल आप अभियुक्त से पूछ रहे हैं?”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “और आप उससे क्या जवाब की उम्मीद करते हैं? चलिए, ये सब भूल जाते हैं. अगर मैं अभियुक्त से पूछूं कि आपने ऐसा किया है, तो आप क्या जवाब की उम्मीद करते हैं? वह इनकार कर देगा, है ना? लेकिन क्या यह असहयोग है? अगर वह चुप है, तो चुप रहने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है.”
पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “आप कहते हैं कि यह असहयोग है? सीबीआई में आपके पास किस तरह के अधिकारी हैं? बिल्कुल फर्जी अधिकारी. सेवा में रहने के लायक नहीं. इस तरह के बेकार दस्तावेज से कुछ नहीं निकलता. सब अनुमान हैं, कोई ठोस बात नहीं है जो कहती हो कि देखो, यह सबूत है.”
मुकदमे में हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक (विद्युत) देशराज पर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर विमल नेगी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है. परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और देशराज समेत तीन लोगों ने नेगी पर ‘गलत काम’ करने का दबाव डाला, जिसके कारण नेगी अत्यधिक तनाव में थे और आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए. शीर्ष अदालत ने देशराज को अग्रिम जमानत देते हुए सीबीआई के रुख पर सवाल उठाया. सीबीआई ने दावा किया था कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया.
