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शिमला मस्जिद विवाद : हाई कोर्ट तक जाएगा मामला, पुलिस ने लगाया कड़ा पहरा, सोशल मीडिया पर भी नजर

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 17 नवंबर। शिमला में एक मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शुक्रवार को हिंदू संगठनों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने से रोक दिया। इस घटना के बाद छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने रविवार को मस्जिद के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। अब मस्जिद के अंदर किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

पुलिस ने संजौली चौक से मस्जिद तक जाने वाले दोनों रास्तों पर अपनी टीमें तैनात कर दी हैं। लोगों को पूरी तरह से वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा है। इस कारण इलाके में तनाव के बावजूद स्थिति पर नियंत्रण बना हुआ है। स्थानीय लोग और दोनों समुदायों के नेता सतर्क नजर आ रहे हैं।

हिंदू संगठनों ने इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका दावा है कि यह मस्जिद एक अवैध ढांचा है और इसे तुरंत गिराया जाना चाहिए। संगठनों ने यह भी कहा है कि जो सुरक्षा इस ढांचे को दी जा रही है, वह इंसानों को मिलनी चाहिए। उनके अनुसार यहां से करीब 100 मीटर दूर पहले से ही एक मस्जिद मौजूद है।

मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मुहमद लतीफ ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि इस मस्जिद को बचाने के लिए वह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। अगर हाईकोर्ट से उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह सुप्रीम कोर्ट तक भी लड़ाई लड़ेंगे। कमेटी कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताती नजर आ रही है।

हिंदू संगठनों के सदस्य मदन ठाकुर ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब इस ढांचे को अवैध घोषित कर दिया गया है और इसे तोड़ने के आदेश जारी हो चुके हैं, तो कार्रवाई तुरंत शुरू होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब इस मस्जिद में लोगों के आने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। इससे स्थिति शांत बनी रहेगी।

ठाकुर ने यह स्पष्ट किया कि उनका विरोध स्थानीय मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनकी मुख्य चिंता बाहरी राज्यों से आए लोगों को लेकर है। उनका मानना है कि बाहरी लोग ही यहां के माहौल को खराब कर रहे हैं। यह बयान विवाद के केंद्र में है।

पुलिस के कड़े कदमों ने हिंसा को फिलहाल रोक दिया है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मनमुटाव बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन दोनों समुदायों के नेताओं से बातचीत कर रहा है। उनका प्रयास है कि बिना किसी उपद्रव के यह मामला शांतिपूर्वक सुलझ जाए। सभी पक्ष कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर सहमत हैं।

इस विवाद ने शिमला की शांति को खतरे में डाल दिया है। एक तरफ जहां हिंदू संगठन अवैध निर्माण को हटाने की मांग कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय अपनी धार्मिक आजादी की रक्षा चाहता है। यह मामला अदालत में जाने के बाद और जटिल हो गया है। अब न्यायिक फैसले का सभी को इंतजार है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में धारा 144 लागू करने पर भी विचार किया है। इससे बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने पर रोक लग सकेगी। पुलिस अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर अफवाहों पर भी नजर बनाए हुए हैं। उनका लक्ष्य किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था बनाए रखना है।

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