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भारत के 10 भ्रष्टाचारी विभागों की लिस्ट जारी, पहले नंबर पर पुलिस विभाग, यहां जानें

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
नेशनल डेस्क, 29 नवंबर। भारत में भ्रष्टाचार को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। देश के 10 सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची जारी कर दी गई है। यह दावा जनता की शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) ने भी इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस लिस्ट में पुलिस विभाग पहले स्थान पर है। आप इस विशेष Hindi News रिपोर्ट में सभी विभागों का हाल जान सकते हैं।

भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस विभाग पहले पायदान पर है। पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने और फर्जी केस बनाने के आरोप हैं। लोग सड़क पर अवैध वसूली और न्याय के बदले पैसे मांगने की शिकायत करते हैं। दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग का नाम आता है। यहाँ जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में पैसे मांगे जाते हैं। कर्मचारी खतौनी निकालने के लिए भी रिश्वत लेते हैं।

तीसरा सबसे भ्रष्ट विभाग नगर निगम को माना गया है। यहाँ मकान का नक्शा पास कराने के लिए रिश्वत चलती है। अधिकारी अवैध निर्माण को अनदेखा करने के पैसे लेते हैं। चौथे स्थान पर ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर के कार्यालय हैं। यहाँ प्रधानमंत्री आवास और शौचालय योजनाओं में धांधली की शिकायतें आम हैं। राशन कार्ड और पेंशन के लिए भी गरीबों को परेशान किया जाता है।

लिस्ट में पांचवां नंबर बिजली विभाग का है। मीटर रीडिंग में हेराफेरी और फर्जी बिलिंग के आरोप लगते हैं। लाइन ठीक करने के लिए भी पैसे मांगे जाते हैं। छठा स्थान सड़क परिवहन विभाग (RTO) का है। यहाँ बिना टेस्ट दिए ड्राइविंग लाइसेंस बन जाते हैं। अनफिट वाहनों को भी पैसे लेकर फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिया जाता है।

सातवें नंबर पर सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग हैं। यहाँ डॉक्टर अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। आठवें स्थान पर शिक्षा विभाग है। शिक्षक भर्ती में घोटाले और फर्जी उपस्थिति के मामले सामने आते हैं। यह रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है।

नौवां स्थान आवास एवं शहरी विकास विभाग को मिला है। यहाँ टेंडर प्रक्रिया और निर्माण ठेकों में भ्रष्टाचार होता है। दसवें नंबर पर इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग है। व्यापारियों से अवैध वसूली और फर्जी रिटर्न के आरोप लगते हैं। कई मामलों में अधिकारी और बिचौलिए मिलकर रिश्वत की रकम बांट लेते हैं। इससे भ्रष्टाचार का स्तर और बढ़ जाता है।

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