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हिमाचल : विधानसभा के बाहर पेंशनर्स का धरना ,HRTC पेंशनर्स को नहीं मिली पेंशन

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कांगड़ा, 28 नवंबर। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तपोवन स्थित पुलिस ग्राउंड आज पूर्व कर्मचारियों, पेंशनरों और आउटसोर्स वर्करों के ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटे इन कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी, आर्थिक लाभ रोकने और कर्मचारी-विरोधी निर्णय लेने के आरोप लगाए।

पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने कहा कि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, समय पर वेतन-पेंशन जारी करने, लंबित डीए देने और मेडिकल बिलों के भुगतान का भरोसा दिलाया था। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी इन वादों का बड़ा हिस्सा अधूरा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य पर बढ़ते कर्ज का हवाला देते हुए सरकार लगातार कर्मचारियों के भत्तों और स्वास्थ्य सुविधाओं में कटौती कर रही है, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के इलाज तक पर संकट खड़ा हो गया है।

घनश्याम शर्मा ने बताया कि रैली पहले ज़ोरावर स्टेडियम में आयोजित होनी थी, लेकिन प्रशासन ने अंतिम समय पर इसे पुलिस ग्राउंड में स्थानांतरित कर दिया। इसे उन्होंने सरकार की घबराहट और “कर्मचारी-विरोधी मानसिकता” का संकेत बताया।

पेंशनर्स नेताओं ने कहा कि यदि लंबित डीए, वेतन-पेंशन, मेडिकल बिलों के भुगतान और हिम-केयर जैसी सुविधाओं पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो राज्यभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य के हक की लड़ाई है।

इसी बीच, ज़ोरावर स्टेडियम में पैरा और मल्टी-टास्क वर्करों ने भी अलग से महंगाई के बीच उचित नीति व वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ज़ोरावर स्टेडियम में जल शक्ति विभाग के पैरा और मल्टी-टास्क वर्करों ने सरकार से स्थायी नीति बनाने की मांग की।

इनका कहना था कि 5–6 हजार रुपये की मासिक आय में परिवार चलाना असंभव हो गया है, बावजूद इसके 68 बार मांग पत्र देने के बाद भी सरकार ने मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया।

उधर, HRTC के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें महीनों-महीनों तक पेंशन नहीं मिल रही। उनका कहना है कि कोर्ट के आदेशों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा है। पूर्व कर्मचारियों के अनुसार, मेडिकल बिलों का भुगतान महीनों से अटका हुआ है और इससे वरिष्ठ नागरिकों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।

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