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शिमला, 13 नवंबर। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग इस महीने के अंत तक चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकता है। आयोग ने चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। केवल औपचारिक घोषणा ही शेष रह गई है।
वर्ष 2011 की जनगणना को चुनाव आधार माना जाएगा। आपदा प्रभावित जिलों में मतदान प्रक्रिया को स्थगित किया जा सकता है। पंचायती राज संस्थाओं का वर्तमान कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो रहा है। सरकार ने समय पर चुनाव कराने का आश्वासन दिया है।
प्रदेश सरकार इन दिनों वार्डों के पुनर्गठन और सीमांकन के कार्य में व्यस्त है। इस प्रक्रिया के चलते चुनाव घोषणा में कुछ देरी संभव है। वार्डों का पुनर्सीमांकन लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल औपचारिक अनुमोदन की प्रक्रिया शेष रह गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई पंचायतों का गठन नहीं किया जाएगा। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में तीन हज़ार पाँच सौ सतहत्तर ग्राम पंचायतें हैं। यह संख्या यथावत बनी रहेगी। सभी जिलों में यह प्रक्रिया समान रूप से लागू होगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी पूरी रखने के निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्तों को चुनावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की जाएगी। सड़क नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने के कारण इन इलाकों में मतदान में देरी हो सकती है।
आयोग को यह तय करना है कि चुनाव में नया रोस्टर लागू किया जाएगा या नहीं। सीटों का आरक्षण पिछले रोटेशन के आधार पर भी रह सकता है। इस संबंध में अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। आयोग ने सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
कुछ पंचायतों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि एक ही सीट लगातार महिलाओं के लिए आरक्षित है। सरकार ने ऐसे मामलों की समीक्षा शुरू कर दी है। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। आरक्षण व्यवस्था में संतुलन सुनिश्चित किया जाएगा।
राज्य सरकार चुनावों को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारी की जा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों की सूची तैयार कर ली है। मतदाता सूचियों का सत्यापन कार्य भी पूरा हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी चुनाव ड्यूटी के लिए तैयार हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक मतदान केंद्र बनाए जा सकते हैं। दुर्गम इलाकों में मतदान दलों को विशेष व्यवस्था के साथ भेजा जाएगा। सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना भी तैयार की जा चुकी है। चुनाव आयोग ने सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
