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शिमला, 28 अगस्त। (अनिल) हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिल उपभोक्ता शुल्क के रूप में ग्राम पंचायतें वसूलेंगी। पंचायत प्रतिनिधियों से 100 रुपये, एपीएल परिवारों से 50 से 100 रुपये, बीपीएल परिवारों से 25 रुपये प्रति माह शुल्क वसूला जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए पानी की व्यवसायिक दरें चुकानी होंगी। ग्राम सभा की बैठक में पंचायतें दरों को अनुमोदित करेंगी।
सुलह से विधायक विपिन सिंह परमार के प्रश्न के लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री ने यह जानकारी दी। सरकार ने पंचायतों के क्षेत्राधिकार में आने वाली पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव का दायित्व ग्राम पंचायतों को सौंपा है। ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्राधिकार में पड़ने वाली पेयजल योजनाओं के रखरखाव का कार्य उपभोक्ता शुल्क से प्राप्त धनराशि से करेंगी। इसे लेकर मानक संचालन प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। भारत सरकार की ओर से जारी जन जीवन मिशन के दिशानिर्देशों के दृष्टिगत जल शक्ति विभाग से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
15 रुपये प्रति बैग महंगा हुआ सीमेंट
सीमेंट कंपनियों ने 1 जनवरी 2023 से 31 जुलाई 2025 तक 6 से 7 बार कीमतों में बढ़ोतरी की है। श्रीयुत अंबुजा सीमेंट और श्रीयुत एसीसी सीमेंट ने 7 बार और श्रीयुत अल्ट्राटेक सीमेंट ने 6 बार सीमेंट के खुले बाजार के दामों में वृद्धि की है। सीमेंट की कीमतों में औसत वृद्धि 15 रुपये प्रति बैग पाई गई है। सीमेंट के बाजार मूल्य निर्धारण का कार्य प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। सुंदरनगर से विधायक राकेश जमवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में उद्योग मंत्री ने सदन में यह जानकारी दी।
क्यों फट रहे बादल अध्ययन के लिए सरकार के पास नहीं मेकेनिजम
हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और बाढ़ की घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास कोई मेकेनिजम उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हाल के वर्षों में हिमाचल में प्राकृतिक आपदाओं में हुई बढ़ोतरी के कारणों की जांच के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से गठित एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय दल ने प्रदेश का दौरा किया है। लाहौल-स्पीति से विधायक अनुराधा राणा के प्रश्न के लिखित उत्तर में राजस्व मंत्री ने सदन में यह जानकारी दी।
