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मंडी, 28 अगस्त। (अनिल) देवभूमि हिमाचल जहां सदियों से देवी.देवताओं की कृपा और आशीर्वाद के चलते जीवन चलता आया है, आजकल लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। बीते कुछ वर्षों में भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, भूकंप और अकाल जैसी आपदाएं इस शांत पहाड़ी प्रदेश को झकझोर चुकी हैं। देवभूमि में इस आपदा को मात्र वैज्ञानिक कारणों से नहीं, बल्कि आस्था के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
मां बगलामुखी के जाग में गुर ने दी चेतावनी
मंडी जनपद के प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में आयोजित वार्षिक जाग के दौरान जो देववाणी आई, उसने पूरे क्षेत्र को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बीती रात हुए इस जाग में सैंकड़ों श्रद्धालु एकत्रित हुए और माता बगलामुखी की देववाणी के माध्यम से आने वाले समय की चेतावनियां सुनीं। जाग के दौरान माता बगलामुखी ने गूर के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि मनुष्य द्वारा प्रकृति और देवनीति के साथ की जा रही छेड़छाड़ अब असहनीय होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मनुष्य नहीं सुधरा, तो आने वाले समय में हिमाचल को और अधिक विनाशकारी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
इस बार युद्ध में जीती डायनें
पुजारी अमरजीत शर्मा ने जानकारी दी कि इस वर्ष के जाग में डायनियों को अंतिम युद्ध में विजय प्राप्त हुई, जो शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार एक अशुभ संकेत माना जाता है। यह संकेत भविष्य में भूकंप, बाढ़, अकाल और जनहानि जैसी भीषण आपदाओं का पूर्वाभास देता है।
देव और डायनियों के महासंग्राम का अंत
हिमाचल की परंपराओं के अनुसार भाद्रपद माह के दौरान देवता और डायनें सात युद्ध करते हैं। इस वर्ष अंतिम युद्ध घोघर धार में हुआ, जहां डायनियों ने शिख.पाथा ;जीत का प्रतीक चिह्नद्ध लेकर विजय हासिल की। इससे पहले देवताओं ने तीन और डायनों ने तीन युद्ध जीते थे। अंतिम युद्ध में डायनों की जीत ने संपूर्ण देव समाज और आम जनमानस को चिंता में डाल दिया है।
गूर के अनुसार यह संकेत देता है कि नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ रहा है और यदि मनुष्य ने अपनी आदतें नहीं बदलीं, विशेषकर प्रकृति के दोहन और धर्मस्थलों के व्यावसायीकरण को नहीं रोका, तो हिमाचल को बड़ी आपदाओं का सामना करना पड़ेगा।
धार्मिक स्थलों के व्यावसायीकरण पर आपत्ति
देववाणी में माता बगलामुखी ने विशेष रूप से देवस्थलों को पर्यटन स्थल बनाने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देवता केवल शांत, स्वच्छ और पवित्र वातावरण में ही वास करते हैं। अत्यधिक भीड़, शोर और व्यावसायिक गतिविधियां देव शक्ति को प्रभावित करती हैं। माता ने अपने भक्तों को यह भी आश्वासन दिया कि जो लोग श्रद्धा और नियमों का पालन करेंगे, उन्हें वह अपनी सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि प्रकृति और धर्म के नियमों के उल्लंघन का परिणाम पूरा समाज भुगतेगा।
भक्ति भाव में लीन रहे श्रद्धालु
वार्षिक जाग के अवसर पर रात्रि 12 बजे तक भजन.कीर्तन और मंत्रोच्चारण होता रहा। श्रद्धालु पूरी भक्ति के साथ माता के जयकारे लगाते रहे और गूर की अग्नि परीक्षा के बाद देववाणी का संदेश सुना। यह आयोजन मंडी जिले की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण रहा, जिसमें परंपरा, आस्था और चेतावनीकृतीनों का समावेश देखने को मिला।
