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शिमला, 29 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार सुबह से ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले छह दिनों तक बारिश से राहत मिलने की संभावना नहीं है।
हिमाचल में फिर बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने आज हिमाचल के चार जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग द्वारा ऊना, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मणिमहेश यात्रियों के लिए चुनौती
चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में करीब तीन हजार मणिमहेश यात्रियों के फंसे होने की सूचना है। भारी बारिश से सड़कें जगह-जगह ध्वस्त हो गई हैं और वाहनों की आवाजाही ठप है। प्रशासन ने शनिवार को बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप
सरकार का दावा है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं, लेकिन चार दिनों से यहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ठप है। जिसके कारण न तो श्रद्धालु अपने परिजनों से संपर्क कर पा रहे हैं और ना ही राहत कार्यों की वास्तविक जानकारी किसी को मिल पा रही है।
भरमौर में कैसे हालात
बीते हफ्ते भरमौर के हड़सर से ऊपर हुए लैंडस्लाइड ने हालात और बिगाड़ दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में 7 श्रद्धालुओं की मौत, 8 घायल और 9 लापता हो चुके हैं। हालांकि सरकार ने दावा किया कि अब तक 10 हजार में से करीब 7 हजार श्रद्धालुओं को सुरक्षित घर भेजा जा चुका है, लेकिन बाकी को निकालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कुल्लू-मनाली में सप्लाई ठप
बारिश के कारण कुल्लू-मनाली में ईंधन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत शुरू हो गई है। कुल्लू में बीते चार दिनों से दूध, दही, ब्रेड, मक्खन और सब्जियों की सप्लाई नहीं पहुंच पाई है।
पेट्रोल-डीजल का संकट गहराने से स्थानीय लोगों और फंसे पर्यटकों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शिक्षा विभाग ने हालात को देखते हुए कुल्लू, मनाली और आनी उपमंडल में 9 स्कूलों, मंडी के गोहर और चंबा सब-डिवीजन में आज भी सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।
टूरिस्ट भी फंसे
बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से बंद हुई सड़कों ने पर्यटन नगरी मनाली और लाहौल-स्पीति को भी अलग-थलग कर दिया है। इन क्षेत्रों में करीब 1500 से अधिक सैलानी फंसे हुए हैं। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे को हल्के वाहनों के लिए खोला गया था, लेकिन शुक्रवार रात की बारिश के बाद यह फिर से कई जगह से ध्वस्त हो गया। ऐसे में बाहर से आए सैलानी अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं।
प्रशासन पर दबाव
लगातार बिगड़ते हालात ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार का दावा है कि राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं, लेकिन नेटवर्क ठप होना, रास्ते टूटना और सप्लाई चेन रुकना लोगों की पीड़ा को और बढ़ा रहा है।
अभी नहीं थमेगी बारिश
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के परिजन सरकार से अपील कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सड़कें बहाल की जाएं और सुरक्षित मार्गों से सप्लाई शुरू की जाए। हकीकत यही है कि आने वाले कुछ दिन हिमाचल के लिए और कठिन साबित हो सकते हैं, क्योंकि मौसम विभाग के मुताबिक भारी बारिश का दौर अभी जारी रहने वाला है।
सदन में उठा आपदा का मुद्दा
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में आई आपदा का मुद्दा गंभीरता से उठाया गया। सभी दलों की सहमति से यह प्रस्ताव पास किया गया कि हिमाचल में आई आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह समय राजनीति का नहीं है। सरकार हर स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और राहत कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावितों को सुरक्षित निकालना और उन्हें जरूरी सहायता देना सरकार की प्राथमिकता है।
किसान-बागवानों को भी बड़ा नुकसान
बारिश और भूस्खलन का सबसे ज्यादा असर कृषि और बागवानी पर पड़ा है। सेब, सब्जियों और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसान और बागवान अपनी सालभर की मेहनत को बर्बाद होते हुए देख रहे हैं। यह आपदा ना केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर असर डालेगीए बल्कि हजारों परिवारों की रोज़ी.रोटी भी छीन सकती है।
