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शिमला, 21 अगस्त। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निलंबित एएसआई पंकज शर्मा को पुलिस गेस्ट हाउस में 24 घंटे निगरानी में रखने के खिलाफ दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की पीठ ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर अनावश्यक प्रतिबंध स्वीकार नहीं किए जा सकते। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि तुरंत ऐसे सभी प्रतिबंध हटाए जाएं और यदि आवश्यक हो तो उसकी सुरक्षा के लिए वैकल्पिक और उचित व्यवस्था की जाए।
गौरतलब है कि पंकज शर्मा पर चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के बाद घटनास्थल से बरामद पेन ड्राइव गायब करने का आरोप है। इस मामले की जांच अब सीबीआई के पास है। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता अनूप रतन ने अदालत को बताया कि सुरक्षा व्यवस्था खतरे की आशंका के चलते की गई थी, लेकिन अब सीबीआई जांच कर रही है, इसलिए राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए तैयार है।
सीबीआई ने अदालत में स्पष्ट किया कि पंकज शर्मा को उनकी ओर से हिरासत में नहीं लिया गया है और यह कार्रवाई उनके निर्देशों पर नहीं हुई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल निलंबित किया गया है, फिर भी बिना किसी कानूनी आदेश के उन्हें जबरन पुलिस गेस्ट हाउस में रखा गया है। यहां तक कि उनके कमरे में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है और 24 घंटे गार्ड तैनात रहते हैं, जिससे उनकी निजी स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
पंकज शर्मा ने अदालत से यह भी मांग की थी कि उन्हें उनके सरकारी आवास भराड़ी में रहने की अनुमति दी जाए, जहां उनका परिवार मौजूद है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्देश जारी किए कि भविष्य में यदि उनकी सुरक्षा को लेकर कोई निर्णय लिया जाता है तो उन्हें विश्वास में लेना अनिवार्य होगा।
इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
