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शिमला: केएनएच अस्पताल में हंगामा - डॉक्टरों पर जुड़वां बच्चों को गायब करने का आरोप, जानें पूरा मामला

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शिमला, 21 जून। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में शुक्रवार को खूब हंगामा हुआ। दरअसल एक महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद उनकी मौत होने और गायब करने जैसे गंभीर आरोप डॉक्टरों पर लगा दिए। सूचना मिलते ही आनन-फानन में मामले की अस्पताल प्रबंधन और पुलिस ने छानबीन शुरू की लेकिन सीसीटीवी फुटेज तथा मेडिकल जांच में महिला की कहानी अस्पताल प्रबंधन फर्जी बताई।

जानिए पूरा मामला

पुलिस ने इसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में संबंधित परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर बाद करसोग की एक महिला और उनका परिवार चाइल्ड केयर यूनिट के बाहर मौजूद था। यहां महिला ने बताया कि वह 10:00 बजे के करीब केएनएच अस्पताल पहुंची थी। यहां माइनर ओटी में डॉक्टर ने उनकी डिलीवरी करवाई जिसमें उसने जुड़वां बच्चों (बेटा बेटी) को जन्म दिया। आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद उसने बच्चों की फोटो भी खिंची लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उनके मुंह में दिक्कत है। इसके बाद डॉक्टर बच्चों को ले गए फिर उन्हें बताया कि बच्चाें की माैत हो गई और उन्हें गायब कर दिया। यही नहीं महिला ने बताया कि उसकी प्रेगनेंसी से संबंधित फाइल भी गायब कर दी है।

10:57 बजे मुख्य गेट से बाहर निकली महिला

इस पूरे मामले को लेकर महिला के पति, सास और अन्य रिश्तेदारों ने रात एक बजे तक खूब हंगामा किया। डीएसपी अमित ठाकर और एसएचओ समेत पुलिस अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो इसमें महिला अपने पति के साथ अस्पताल परिसर में घूमती दिखाई दे रही है लेकिन न ही वह माइनर ओटी और न ही लेबर रूम में प्रवेश करते हुए दिख रही है। सुबह 10:24 बजे अस्पताल में दाखिल होते हुए महिला दिखाई दे रही है। इसके बाद वह लेबर रूम के बाहर से होते हुए ओपीडी ब्लॉक में गई। सुबह 10:36 के करीब बजे महिला माइनर ओटी की ओर बढ़ी, 10:38 बजे वह प्री-नेटल एरिया में पहुंची। 10:40 बजे वह गलियारे में फोन पर बात करती हुई दिखाई दी। इसके बाद वह 10:43 बजे मेन ओटी की ओर गई और 10:47 बजे ओपीडी ब्लॉक ए के पहले मंजिल पर डॉ. सुभाष के केबिन की ओर बढ़ी। 10:48 बजे महिला दूसरे फ्लोर के मुख्य गेट के पास पहुंची और 10:57 बजे मुख्य गेट से बाहर निकल गई। 

विशेषज्ञ ने इसे सुडोसाइसिस से जुड़ा मामला बताया

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी फुटेज की जांच के आधार पर मामला फर्जी लग रहा है। विशेषज्ञ इसे स्यूडोसाइसिस से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जिसमें कोई शख्स तथ्यों से परे झूठी कहानी गढ़ता है। इस मामले को समाज में महिलाओं पर बच्चों को जन्म देने के लिए डाले जाने वाले दवाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

अस्पताल का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा पाई महिला

टीम भी मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने महिला से अस्पताल से संबंधित दस्तावेज मांगे लेकिन परिवार वह नहीं दिखा पाया। जांच करने पर पंजीकरण से संबंधित कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला। डॉक्टरों ने यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट करवाया लेकिन वह भी निगेटिव निकला। पुलिस महिला को दीनदयाल उपाध्याय क्षेत्रीय अस्पताल (डीडीयू) में मेडिकल करवाने के लिए ले गई है जिसकी रिपोर्ट के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। देर रात तक इस मामले को लेकर अस्पताल में हंगामा होता रहा।

महिला का जुड़वा बच्चों को जन्म देना और अन्य आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। सीसीटीवी फुटेज की जांच में साफ दिखाई दे रहा है कि महिला परिसर में ही घूम रही है। यूरिन टेस्ट में भी महिला की रिपोर्ट निगेटिव आई है। रिपन अस्पताल में महिला का मेडिकल करवाया जा रहा है। महिला का दो वर्षों से अस्पताल में इनफर्टिलिटी का उपचार चल रहा था। -डॉ. सुरेंद्र सिंह नेगी, चिकित्सा अधीक्षक केएनएच

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