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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार गंभीर, मिशन मोड पर समितियां गठन करने के निर्देश

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शिमला, 20 जून। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डेयरी सहकारी समितियों का गठन मिशन मोड पर करने के निर्देश दिए हैं। पशुपालन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ये समितियां डेयरी क्षेत्र में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 910 ग्राम पंचायतों में डेयरी सहकारी समितियां कार्यरत हैं और विभाग को कार्यशील समितियों की संख्या बढ़ाने के लिए दृढ़ता से कार्य करना चाहिए।

कांगड़ा जिला में निर्माणाधीन ढगवार दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र की समीक्षा करते हुए उन्होंने संयंत्र के कार्य की प्रगति की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 225 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला यह दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र का कार्य जून, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा।

ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। हम डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए राज्य सरकार ने गाय के दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 61 रुपये प्रति लीटर किया है। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले तीन वर्षों में मिल्कफेड की दूध खरीद में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऊना जिले के झलेड़ा, हमीरपुर जिले के झलाड़ी, सिरमौर जिले के नाहन, कुल्लू जिला के मोहल, सोलन जिला के नालागढ़ और शिमला जिला के रोहड़ू में 120 करोड़ रुपये की लागत से छह नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र और दूध शीतन (चिलिंग) संयंत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों से दूध एकत्रित करने में भी सहायता मिलेगी तथा उनकी आर्थिकी भी सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री ने मिल्कफेड को निर्देश दिए कि वे पहाड़ी गाय के दूध से बने हिम-घी ब्रांड को प्रोत्साहित करें ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके। उन्होंने राज्य में गौ सदनों की स्थापना के लिए चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की तथा इनके कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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