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हिमाचल: HPPCL में विमल नेगी पर क्या घोटाला दबाने का प्रेशर था, CBI को जांच सौंपने की मांग

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला। HPPCL के चीफ इंजीनियर विमल नेगी पर क्या एक बड़े घोटाले को दबाने का प्रेशर तो नहीं था, जिसके कारण उन्होंने मजबूरन खुदकुशी की? इस बात के सबूत ऊर्जा निगम के पूर्व एमडी सुनील ग्रोवर ने मामले की जांच कर रहे ACS ओंकार शर्मा को एक हलफनामे के जरिए सौंपे हैं। भाजपा ने गुरुवार को ठियोग में विमल नेगी की मौत की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला।

क्या लिखा है हलफनामे में?

हलफनामे में लिखा है कि HPPCL के प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और निगम के निलंबित निदेशक देशराज ने विमल नेगी पर काम का इतना दबाव बना रखा था कि उन्हें बीते 6 माह में एक बार भी छुट्टी नहीं दी गई। सुनील ग्रोवर के मुताबिक, 450 मेगावाट क्षमता वाली शोंगटोंग कड़छम हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और ऊना में शुरू हुई 32 मेगावाट की पेखुबेला सोलर पावर प्रोजेक्ट में भारी घोटाला हुआ है। ग्रोवर का आरोप है कि लागत बढ़ाने के लिए दोनों प्रोजेक्ट्स के डीपीआर में हेरफेर किया गया।

कम रेट पर दिया गया ठेका

ऊना वाले सौर प्रोजेक्ट के लिए टेंडर मार्च 2023 में जारी हुए और उसके अगले माह इन्हें खोला गया। उस समय सौर पीवी मॉड्यूल की लागत 28 रुपए प्रति किलोवाट प्रति यूनिट थी। लेकिन ठेका 20 फीसदी कम रेट पर दिया गया। ठेका देने के 15 दिन बाद रेट्स में 50 फीसदी की और कमी की गई और इस तरह 14 रुपए प्रति किलोवॉट प्रति यूनिट की दर से ठेका दिया गया। सुनील ग्रोवर ने यह भी आरोप लगाया है कि HPPCL ने कभी इस मामले को लेकर चर्चा तक नहीं की।

जबरदस्ती रेट बढ़ाए

ग्रोवर ने अपने हलफनामे में यह भी आरोप लगाया है कि HPPCL ने 32 मेगावाट के इस सोलर प्रोजेक्ट को 220 करोड़ रुपए की लागत में मंजूर किया, जो कि राष्ट्रीय औसत 3.5 करोड़ से 4 करोड़ के मुकाबले 6.8 करोड़ प्रति मेगावाट के रूप में बहुत ज्यादा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि एक उच्च स्तरीय अधिकार कमेटी ने टेंडर उठाने वाली कंपनी को परियोजना पूरा करने के लिए ज्यादा मोहलत देने की सिफारिश की थी, जबकि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह पाया गया था कि देरी असल में टेंडर उठाने वाले फर्म की ओर से हुई थी।

सीबीआई को सौंपें जांच

इस बीच, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बलबीर शर्मा की अगुवाई में पार्टी ने गुरुवार को ठियोग में कैंडल मार्च निकालकर विमल नेगी की मौत की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। कैंडल मार्च में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश डोगरा, अजय श्याम, शशि बाला, कौल नेगी, जिला के सभी मंडल अध्यक्षों सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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