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प्रदेश में नहीं होगी अस्थाई शिक्षकों की भर्ती, HPPSC भरेगा खाली पद : CM

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शिमला, 27 अप्रैल - मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की अस्थाई भर्ती नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार जब भी शिक्षकों की भर्ती करेगी तो यह सिर्फ और सिर्फ लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जाएगी। बैकडोर से कोई भी भर्ती नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार ने कमेटी बनाई है और उससे शिक्षकों के खाली पदों की जानकारी मांगी गई है। प्रदेश सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और आगे भी यह क्रम जारी रहेगा।

गौर हो कि बीते मंगलवार को राज्य सचिवालय में कैबिनेट सब कमेटी की बैठक के बाद उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने बताया था कि हिमाचल प्रदेश में बिना साक्षात्कार लिए सिर्फ शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हजारों अस्थायी शिक्षकों की भर्ती होगी। जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों में दो या तीन साल के लिए यह नियुक्तियां होंगी। नीति के तहत राज्य कैडर की शिक्षा निदेशक और जिला की भर्तियां उपनिदेशक करेंगे।

नियमित भर्तियों की तरह ही इनमें आरक्षण रोस्टर और भर्ती एवं पदोन्नति नियम लागू होंगे। प्रवक्ताओं की भर्ती राज्य स्तर पर होगी। भर्तियों में अभ्यर्थी के दसवीं, बारहवीं और स्नातक में प्राप्त अंकों के साथ टेट की मेरिट देखी जाएगी। प्रदेश में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए गठित कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा था कि जनजातीय व दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

मुख्यमंत्री सुक्खू को जारी करना पड़ा वीडियो
शिक्षकों की अस्थायी भर्तियों को लेकर बीते तीन दिनों से प्रदेश में जारी विरोध के बीच वीरवार को मुख्यमंत्री कार्यालय को वीडियो जारी करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने वीडियो जारी कर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कहीं भी शिक्षकों की अस्थायी भर्ती नहीं करने जा रही है। मैंने आज सुबह समाचार पत्रों में पढ़ा कि सरकार शिक्षा निदेशक और उपनिदेशकों के माध्सम से भर्तियां करने जा रही है।

किसी भी प्रकार की बैकडोर भर्ती की सरकार की मंशा नहीं है। कैबिनेट सब कमेटी से शिक्षकों के खाली पदों की जानकारी मांगी गई है। नियुक्तियां लोकसेवा आयोग के माध्यम से ही होंगी। भ्रम जाल फैलाया जा रहा है। सरकार की ऐसी कोई भी नीति नहीं है। सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है। सरकार खाली पड़े शिक्षकों के पदों को पारदर्शी तरीके से भरेगी।

लोकसेवा आयोग, बैचवाइज आधार पर भरेंगे पद : रोहित

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य लोक सेवा आयोग, बैचवाइज आधार, पदोन्नति और स्टाफ के युक्तिकरण के माध्यम से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा विभाग में पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। वर्तमान प्रदेश सरकार इस समस्या के निवारण के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। शिक्षकों की नियुक्ति का निर्णय पूर्ण मेरिट व विद्यार्थियों के हितों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अलावा अन्य सभी विभागों में नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। राज्य में विशेषकर, जनजातीय एवं दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों के 12 हजार से अधिक रिक्त पद हैं।

शिक्षकों की अस्थायी भर्ती के विरोध में भड़के बेरोजगार, सचिवालय के नजदीक दिया धरना

शिक्षकों की अस्थायी भर्ती के विरोध में बेरोजगार शिक्षित युवा भड़क गए हैं। वीरवार को युवाओं ने सचिवालय के नजदीक छोटा शिमला बस स्टॉप पर नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ धरना दिया। युवाओं ने रोजगार के अवसर तलाशने को गठित कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष व उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बयानों को विरोधाभासी बताया। कहा कि दो से तीन साल के लिए अस्थायी शिक्षक भर्ती करने की नीति गलत है।

युवाओं ने नियमित भर्तियां करने की मांग रखी। सोशल मीडिया में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के वायरल हुए अस्थायी शिक्षक भर्ती प्रस्ताव को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा। धरना प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। युवाओं ने कहा कि वीरवार को वह उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान से मिले और अस्थायी भर्ती न करने की उनसे मांग की गई। कहा कि शैक्षणिक योग्यता के आधार पर भर्ती करना ठीक नहीं है।

इसमें पारदर्शिता नहीं है। युवा सरकारी नौकरियों के इंतजार में लंबे समय से पढ़ाई कर रहे हैं। युवाओं ने कहा कि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट तौर पर बयान दिया है कि दो से तीन साल के लिए अस्थायी तौर पर शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कह रहे हैं कि इस बारे में मुझे समाचार पत्रों से पता चला है। प्रदेश में अस्थायी भर्ती नहीं होगी। युवाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री के बयान विरोधाभासी हैं। सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए।

अस्थायी शिक्षक भर्ती किसी के भी हित में नहीं है। सरकार को लोकसेवा आयोग के माध्यम से ही लिखित परीक्षा करवाकर नियमित आधार पर शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए। युवाओं ने आशंका जताते हुए कहा कि नगर निगम शिमला के चुनाव के चलते मुख्यमंत्री ने कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में लिए गए फैसले को नकारा है। सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

युवाओं ने कहा कि सरकार ने अगर अस्थायी शिक्षक भर्ती के प्रस्ताव को वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। दो से तीन साल के लिए नियुक्त होने वाले अस्थायी शिक्षकों के सहारे विद्यार्थियों के भविष्य को नहीं छोड़ना चाहिए। युवाओं ने कहा कि सरकार से उन्हें बहुत उम्मीदें थीं, कैबिनेट सब कमेटी के प्रस्ताव ने युवाओं के हितों से खिलवाड़ किया है।

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