Click Here to Share Press Release Through WhatsApp No. 82196-06517 Or Email - pressreleasenun@gmail.com

Himachal : हिमाचल के लोगों को विधायकों और सांसदों के खिलाफ दिया जाए राइट टू रिकॉल का अधिकार- राइट फाउंडेशन : जानिए राइट टू रिकॉल के बारे में

News Updates Network
By -
0

हिमाचल में भ्रष्टाचार और विधायकों की मनमानियों को देखते हुए राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने राइट टू रिकॉल का अधिकार देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रदेश में लोग अभावों में जी रहे है और नेताओं की ऐश है। नेता कानून और संविधान तक को ताक पर रख कर मनमानियां कर रहे है। जब भी किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार फैलाने की शिकायतें की जाती है तो वोट बैंक के लिए सत्ता में बैठे नेता चुपी साध लेते है और भ्रष्टाचार फैलाने वालों को बचा लेते है। जोकि जरा सा भी न्याय संगत नही है।

यह बात पूरी तरह तर्कसंगत है कि हिमाचल में आए दिन भ्रष्टाचार और अन्याय अपने पैर पसार रहा है और प्रशासन और सरकार भ्रष्टाचार और अन्याय को रोकने के कोई ठोस कदम उठाने को तैयार नही है। आए दिन हिमाचल में पंचायतों, सरकारी विभागों, विधायकों, सांसदों और दूसरे तरह के मामले सामने आते रहते है लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नही होती क्योंकि उनको किसी ना किसी विधायक या सांसद का संरक्षण प्राप्त होता है और वह साफ बच जाते है। 


आए दिन आप देखते होंगे कि पंचायत प्रधानों के खिलाफ धांधलियों, भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे का दुरुपयोग के आरोप लगते है लेकिन विधायकों का संरक्षण होने के कारण कोई भी अधिकारी आरोप साबित होने पर भी प्रधानों को बर्खास्त नही करता। इतना ही नही कई मामलों में विधायकों पर भी इसी तरह के आरोप लगाते है लेकिन कोई कार्यवाही नही होती। जिसके चलते हमें लगता है कि राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष द्वारा उठाई है यह मांग पूर्ण रूप से न्यायसंगत है। 

राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार का कहना है कि हिमाचल में भ्रष्टाचार की मुख्य जड़ विधायकों और सांसदों का निरकुंश और तानाशाह हो जाना है। उन्होंने कहा कि जब कोई विधायक और सांसद एक बार चुन लिए जाते है तो उनको पांच सालों तक हटाने का कोई प्रावधान नही है। जिसके चलते वह पूर्ण रूप से निरकुंश हो जाते है। प्रदेश में ठेकेदार और पूंजीपति वर्ग के लोगों को हर प्रकार का संरक्षण प्राप्त है क्योंकि वह चुनाव के समय नेताओं की मदद करते है। जबकि इसके विपरीत महिलाओं, बच्चों, गरीबों, मजदूरों, किसानों और बागवानों को कोई संरक्षण नही मिलता। जबकि यह सब प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या है।

उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश की आम जनता को राइट टू रिकॉल का अधिकार मिलता है तो विधायकों और सांसदों को डर होगा कि वह कोई भी गलत काम करेंगे तो जनता उनको वापिस बुला लेगी और प्रदेश की 90 प्रतिशत आबादी पर अत्याचार खत्म होंगे और उनको संरक्षण भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून कठोर से कठोरतम बनाया जाना चाहिएम जैसेकि किसी विधायक और सांसद को राइट टू रिकॉल के अंतर्गत वापिस बुलाया जाए तो उससे वेतन भत्तों की रिकवरी की जाए तथा आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा कर पेंशन का अधिकार भी छीन लिया जाना चाहिए।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!