वहीं उद्योगों में भी ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी को दूर किया जाएगा। कोविड-19 के दौर में आई दूसरी लहर के दौरान उद्योग विभाग और जिला प्रशासन विशेष प्रयासों से ही यह जिला में सबसे बड़ा ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो सका है। हालांकि इस प्लांट की स्थापना का काम वर्ष 2011-12 में शुरू हो गया था। लेकिन किन्ही कारणों के चलते उस वक्त यह मुकम्मल नहीं हो पाया था। उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अंशुल धीमान के हस्तक्षेप और प्रोत्साहन से इसे अब स्थापित करने के बाद ट्रायल बेसिस पर शुरू भी कर दिया गया है। जिला ऊना में ऑक्सीजन का सबसे बड़े प्लांट को स्थापित करने का क्रम 2011-12 में शुरू कर दिया गया था। हालांकि उस वक्त यह प्लांट शुरू नहीं हो पाया।
अब जबकि कोविड-19 का दौर शुरू हुआ और दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन को लेकर जैसे आपाधापी का माहौल पैदा हुआ। उस वक्त उद्योग विभाग और जिला प्रशासन ने बंद पड़े इस ऑक्सीजन प्लांट को शुरू करने के लिए संचालकों से बैठक की और उन्हें काफी प्रोत्साहन दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि अब जिला ऊना में ऑक्सीजन का सबसे बड़ा प्लांट शुरू हो गया है। इससे पहले भी जिला ऊना के गगरेट में एक ऑक्सीजन का प्लांट कार्य कर रहा है जिसकी कपैसिटी रोजाना 400 सिलेंडर तक भरने की है लेकिन अब यह न्य प्लांट शुरू होने से जिला के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ साथ उद्योगों में आॅक्सीजन की कमी आड़े नहीं आएगी। प्लांट के संचालक ठाकुर जगदीश सिंह का कहना है कि प्रशासन द्वारा प्रोत्साहित करने के बाद ही उन्होंने यह प्लांट तैयार किया है और इस प्लांट के शुरू होने से केवल ऊना जिला ही नहीं बल्कि साथ लगते कई क्षेत्रों में आॅक्सीजन की कमी को पूरा किया जा सकता है।वहीं इस प्लांट के दूसरे संचालक टीएन द्विवेदी का कहना है अभी इस प्लांट में 600 से 700 सिलेंडर प्रतिदिन भरने की क्षमता है।
आने वाले दिनों में इसे जरूरत के मुताबिक बढ़ाया भी जा सकता है। इसके साथ ही प्लांट से नाइट्रोजन भी 20 से 25 फीसदी तक भरी जा सकती है। वहीं उद्योग विभाग के महाप्रबन्धक अंशुल धीमान की माने तो कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केवल ही ऑक्सीजन प्लांट काम कर रहा था और उस दौरान उस प्लांट पर काफी दबाब भी रहा लेकिन अब जिला में दूसरा प्लांट तैयार हो गया है जिससे अब ऑक्सीजन की कमी नहीं रहेगी।
