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शिमला, 01 सितंबर। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में नशे के काले कारोबार पर पुलिस का कड़ा प्रहार जारी है। बैकवर्ड लिंकेज की गहनता से जांच करते हुए शिमला पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय नशा नैटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने युवाओं को चिट्टा सप्लाई करने वाले मुख्य सप्लायर को चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
रिकवरी वैन में मिले 11.35 ग्राम चिट्टे से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की जड़ें पिछले सप्ताह की एक कार्रवाई से जुड़ी हैं। 23 अगस्त को रामपुर बुशैहर उपमंडल की डिटैक्शन टीम ने किंगल के पास सोफा कैंची में एक रिकवरी वैन को तलाशी के लिए रोका था। इस तलाशी के दौरान पुलिस को वैन से 11.35 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुमारसैन पुलिस थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21/29 के तहत मुकद्दमा दर्ज किया और मौके से 4 आरोपियों कुलदीप, ललित, विक्रम और संजीव कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
रिमांड के दौरान आरोपी ललित ने उगला सप्लायर का नाम
इन चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इनके सप्लाई नैटवर्क को खंगालना शुरू किया। पुलिस रिमांड के दौरान जब आरोपी ललित कुमार से सख्ती से पूछताछ की गई, तो वह टूट गया और उसने उस मुख्य व्यक्ति का नाम उगल दिया जो उन्हें यह नशा मुहैया करवाता था। ललित ने खुलासा किया कि उन्हें यह खेप चंडीगढ़ के मनीमाजरा स्थित इंदिरा कालोनी के रहने वाले 60 वर्षीय नरेश कुमार ने दी थी।
ललित के इस अहम खुलासे के बाद जिला शिमला पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुख्ता सबूतों के आधार पर टीम ने चंडीगढ़ के मनीमाजरा में दबिश दी और मुख्य सप्लायर नरेश कुमार (पुत्र शोंकी राम) को धर दबोचा। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी नरेश कुमार पेशे से मैकेनिक है और वह इसी काम की आड़ में गुपचुप तरीके से युवाओं को चिट्टा सप्लाई करने का अवैध धंधा चला रहा था।
नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त में नरेश कुमार की अहम भूमिका पाई गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर शिमला लाया, जहां उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत ने आरोपी नरेश कुमार को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि वह चंडीगढ़ में यह खेप कहां से लाता था और हिमाचल में उसके नैटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
