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शिमला, 23 जुलाई। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक युवक के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और पोक्सो कानून के तहत एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने पाया कि डीएनए रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक सबूतों ने युवक को पूरी तरह बेकसूर साबित कर दिया है। इस कारण उसे मुकदमे की मानसिक प्रताड़ना में नहीं रखा जा सकता।
नाबालिग के आरोपों पर बिलासपुर पुलिस ने किया था केस
बिलासपुर जिले के महिला पुलिस थाने में साल 2023 में एक नाबालिग लड़की के बयान पर मामला दर्ज हुआ था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि नौ मार्च 2023 को युवक ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया और धमकी दी। बाद में पीड़िता के गर्भवती होने पर उसने एक बच्चे को जन्म दिया था।
डीएनए रिपोर्ट में आरोपी युवक का सैंपल नहीं हुआ मैच
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता, नवजात बच्चे और आरोपी युवक के डीएनए सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे। जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि याचिकाकर्ता युवक का डीएनए बच्चे से मैच नहीं कर रहा है। इसके बाद जांच एजेंसी ने अन्य संदिग्धों के डीएनए सैंपल लेने का फैसला किया।
सगे भाई का डीएनए निकला मैच, पीड़िता ने कबूली सच्चाई
लैब में जब पीड़िता के सगे भाई का सैंपल जांचा गया तो वह नवजात शिशु से 100 प्रतिशत मैच हो गया। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने पुष्टि की कि लड़की का भाई ही बच्चे का जैविक पिता है। इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़िता ने भी भाई के साथ संबंध होने की बात मान ली।
