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शिमला, 16 मई। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रदेश भर में बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस लिए, जिसके बाद अब तक कुल 104 पंचायतें सर्वसम्मति से यानी निर्विरोध चुन ली गई हैं। इनमें से 66 पंचायतों का फैसला अकेले शुक्रवार को ही हुआ।
सरकार ने इन सभी निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 25-25 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है। अभी इस आंकड़े में कांगड़ा और किन्नौर जिलों का पूरा डेटा शामिल होना बाकी है। दूसरी तरफ, जिन पंचायतों में आपसी सहमति नहीं बन पाई है, वहां राज्य चुनाव आयोग 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में मतदान करवाएगा।
अगर जिलावार स्थिति को देखें, तो शिमला जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है, जहां सबसे ज्यादा 42 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इसके बाद सिरमौर में 24, लाहौल-स्पीति में 17 और सोलन में 11 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। ऊना में 5, मंडी में 3, कुल्लू में 2 और चम्बा व बिलासपुर में 1-1 पंचायत निर्विरोध बनी है। कांगड़ा जिले की भी वगली पंचायत में सर्वसम्मति बनी है। इस मामले में हमीरपुर प्रदेश का इकलौता ऐसा जिला रहा, जहां एक भी पंचायत निर्विरोध नहीं चुनी जा सकी और सभी जगह चुनाव होंगे। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी संख्या वार्ड सदस्यों (पंचों) की रही है, जो बिना किसी मुकाबले के चुने गए हैं, हालांकि कई जगहों पर प्रधान, उपप्रधान और बीडीसी सदस्यों का चयन भी सर्वसम्मति से हुआ है।
शुक्रवार को दोपहर 3 बजे जैसे ही नामांकन वापस लेने की समय-सीमा खत्म हुई, चुनावी मैदान में डटे सभी उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए। इस बार पूरे प्रदेश से कुल 85,462 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था, जिनमें से 2 हजार से ज्यादा प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। चुनाव आयोग का मानना है कि जमीनी स्तर से पूरी रिपोर्ट आने के बाद नाम वापस लेने वालों की यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। फिलहाल, चुनाव चिन्ह मिलते ही सभी उम्मीदवारों ने अपनी जीत पक्की करने के लिए प्रचार अभियान को तेज कर दिया है।
