न्यूज अपडेट्स
शिमला, 22 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग उपमंडल के अंतर्गत आने वाले चियोग क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक सरकारी स्कूल में ढाई साल के मासूम बच्चे के साथ मारपीट का मामला प्रकाश में आया है।
पीड़ित बच्चे के पिता ने अत्यंत दुखी मन से आरोप लगाया कि उन्होंने अपने नन्हे से बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद में स्कूल भेजा था, लेकिन उन्हें सपने में भी अंदाजा नहीं था कि वहां उसके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार होगा। घटना का पता तब चला जब पिता को उनकी बहन का फोन आया और उसने बताया कि बच्चे को स्कूल में बुरी तरह पीटा गया है। पिटाई का कारण सिर्फ इतना था कि उस ढाई साल के अबोध बालक ने स्कूल में पॉटी (मल त्याग) कर दी थी, जिसे शिक्षिका सहन नहीं कर पाई और अपना आपा खोते हुए बच्चे पर हाथ उठा दिया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू शिक्षिका का वह अड़ियल रवैया रहा, जिसका सामना पिता को तब करना पड़ा जब वे इस घटना की शिकायत करने पहुंचे। पिता का आरोप है कि जब उन्होंने बच्चे पर हाथ उठाने का कारण पूछा, तो शिक्षिका ने सहानुभूति दिखाने के बजाय अहंकार दिखाते हुए कहा कि "मार दिया तो क्या हुआ, हम यहाँ बच्चों की पॉटी साफ करने के लिए नहीं बैठे हैं।" इतना ही नहीं, शिक्षिका ने अपनी ऊँची पहुँच और रसूख का हवाला देते हुए पीड़ित परिवार को खुलेआम चुनौती दे डाली कि "मेरी बहुत जान-पहचान है, तुम्हें जो करना है कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा।"
यह घटना न केवल एक छोटे बच्चे के कोमल मन पर गहरा आघात है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। एक ऐसा संस्थान जहाँ बच्चों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए, वहां इस तरह की हिंसा और उसके बाद दी गई धमकियां सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं। फिलहाल इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ अभिभावकों में भी भारी रोष है। लोग मांग कर रहे हैं कि मासूम के साथ हुई इस बदसलूकी के लिए जिम्मेदार शिक्षिका पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करे, ताकि व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे और भविष्य में किसी और मासूम को ऐसी प्रताड़ना न झेलनी पड़े।
