Click Here to Share Press Release Through WhatsApp No. 82196-06517 Or Email - pressreleasenun@gmail.com

हिमाचल पथ परिवहन निगम के 390 सरेंडर रूटों पर सियासत तेज, बेरोजगारों को मिलेगा लाभ या बनेगा ड्रॉ का खेल?

Anil Kashyap
By -
0
न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 04 मार्च। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) द्वारा प्रदेश भर में 390 बस रूट घाटे के चलते सरेंडर किए जाने के बाद अब इन रूटों को सरकार की राजीव गांधी स्टार्टअप योजना के तहत बेरोजगारों को देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और परिवहन सेवाएं भी सुचारु रहेंगी।

हालांकि, योजना की पात्रता शर्तों को लेकर अब कई सवाल खड़े हो गए हैं।

चार श्रेणियों में मांगे गए आवेदन

परिवहन विभाग की ओर से जिन रूटों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए, उनमें चार श्रेणियां शामिल की गईं—

Unemployed (बेरोजगार)
Women Owned (महिला स्वामित्व)
Ex-Serviceman (पूर्व सैनिक)
Co-operative Society (सहकारी समिति)

योजना का उद्देश्य बेरोजगारों को अवसर देना बताया गया है, लेकिन आवेदन की इन श्रेणियों ने ही नई बहस को जन्म दे दिया है।

सहकारी समितियों पर उठे सवाल

आलोचकों का कहना है कि सहकारी समितियां स्वयं में एक संगठित इकाई होती हैं, जो रोजगार सृजन का माध्यम मानी जाती हैं। ऐसे में उन्हें “बेरोजगार” श्रेणी के साथ समान अवसर देना योजना की मूल भावना के विपरीत माना जा रहा है।

पूर्व सैनिकों की पात्रता पर भी चर्चा

इसी प्रकार पूर्व सैनिकों (Ex-Serviceman) को भी पात्र श्रेणी में शामिल किया गया है। जबकि पूर्व सैनिकों को सरकार से पेंशन सहित अन्य सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब योजना विशेष रूप से बेरोजगार युवाओं के लिए बनाई गई है, तो क्या इसमें अन्य सक्षम वर्गों को शामिल करना उचित है?

ड्रॉ प्रणाली से बढ़ी अनिश्चितता

सरकार ने यह भी शर्त जोड़ी है कि यदि किसी एक रूट के लिए अधिक आवेदन आते हैं, तो रूट परमिट का आवंटन ड्रॉ (लॉटरी) के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रावधान से यह आशंका जताई जा रही है कि रूट परमिट किसी भी श्रेणी के आवेदक को मिल सकता है—चाहे वह बेरोजगार हो, पूर्व सैनिक या सहकारी समिति।

इससे यह संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है कि सभी रूट वास्तव में बेरोजगार युवाओं को ही मिल पाएंगे।

नीति निर्माण पर उठे सवाल

पूरे प्रकरण को लेकर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या नीति निर्माण के दौरान इन पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया? यदि योजना का उद्देश्य बेरोजगारों को प्राथमिकता देना है, तो क्या पात्रता और चयन प्रक्रिया में स्पष्ट वरीयता तय नहीं होनी चाहिए थी?

अब देखना यह होगा कि सरकार इन आपत्तियों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या योजना में कोई संशोधन किया जाता है, ताकि वास्तव में जरूरतमंद बेरोजगारों को इसका लाभ मिल सके।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!