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हिमाचल : संघोई धार में 34वें दिन भी जारी धरना, कड़ाके की ठंड में ग्रामीण अडिग, SDM पर अनदेखी और FIR दबाने के आरोप

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न्यूज अपडेट्स 
सोलन, 02 जनवरी। धरना स्थल संघोई धार में अंबुजा (अदाणी) सीमेंट कंपनी की ब्लास्टिंग के विरोध में चल रहा आंदोलन आज अपने 34वें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रभावित ग्रामवासी और परिवार क्रमिक भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष नहीं रुकेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि 16 और 22 दिसंबर को SDM अर्की के साथ हुई बैठकों के बाद न तो कोई नई बैठक बुलाई गई और न ही पहले हुई बैठकों पर कोई ठोस निर्णय या कार्रवाई सामने आई। इससे प्रशासन के प्रति लोगों में भारी रोष और अविश्वास पैदा हो गया है।

आंदोलनकारी ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि SDM कार्यालय में बंद कमरे की बैठकों के दौरान घमारो ब्लास्टिंग मामले में FIR को दबाने की साजिश की गई। मंच द्वारा पहले ही इस तरह की आशंका जताई गई थी, जो अब सही साबित होती दिख रही है, क्योंकि अब तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई है।

प्रभावित परिवारों ने स्पष्ट किया है कि जब तक DC सोलन स्वयं धरना स्थल पर आकर स्थिति का जायजा नहीं लेते, तब तक अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल जारी रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर आकर कार्रवाई की जरूरत है।

ग्रामीणों ने अंबुजा (अदाणी) कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी रात के अंधेरे में खनन क्षेत्र में ब्लास्टिंग कर रही है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है।

इस पूरे मामले पर सीमेंट उद्योग प्रभावित मंच के राज्य संयोजक संदीप ठाकुर ने कहा कि यह घटनाक्रम स्थानीय प्रभावितों के साथ हुए विश्वासघात और प्रशासन–कंपनी की मिलीभगत को दर्शाता है। उन्होंने मामले में न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेट इंक्वायरी और DC सोलन द्वारा स्वयं मौके पर आकर जांच की मांग की।

आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक

घमारो ब्लास्टिंग मामले में FIR दर्ज नहीं होती,
अवैध ब्लास्टिंग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती,
और DC सोलन धरना स्थल पर नहीं आते,

तब तक क्रमिक भूख हड़ताल कम से कम आगामी दिनों तक और आवश्यकता पड़ी तो आगे भी जारी रहेगी।

ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब मीटिंग के बहाने, खोखले आश्वासन और बंद कमरे की साजिशें स्वीकार नहीं होंगी। यह लड़ाई उनके अस्तित्व, सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।

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