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हमीरपुर, 09 नवंबर। पांच से दिन से मौत से जंग लड़ रही रंजना आखिर हार गई हैं। इसी के साथ पांच दिन से मां के स्वस्थ होने और घर लौटने की उम्मीदें लगाए उनके बेटे वीरेंद्र उर्फ गोलू की उम्मीदें भी दम तोड़ गई हैं। सदर थाना के तहत सासन पंचायत में सामने आई हृदयविदारक वारदात ने हर किसी को झकझोर दिया है। यह वारदात सामाजिक व्यवस्था पर ही बड़ा सवाल और कलंक बन गई है। यहां एक नाबालिग लड़के ने दुष्कर्म करने के इरादे से भोली-भाली रंजना देवी पर हमला कर दिया।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि बचाव में संघर्ष करते हुए रंजना देवी चोटिल हुईं और उनका कान तक कट गया। पीजीआई चंडीगढ़ में पांच दिनों तक रंजना देवी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रहीं। शुक्रवार रात को महिला के जीवन की डोर टूट गई। महिला की मौत के बाद उनके 17 साल के दिव्यांग बेटे वीरेंद्र उर्फ गोलू के सिर से मां का साया उठ गया है।
रंजना ही दिव्यांग लड़के की देखभाल करती थी। गोलू पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर था। रिश्तेदार और करीबी पांच दिन से गोलू को संभाले हुए थे, लेकिन अब उसे संभालने के लिए किसी परिवारजन के पास हिम्मत और शब्द बमुश्किल ही बचे हैं। गोलू को यह इल्म नहीं है कि अब वह अपनी मां के हाथों से खाना नहीं खा पाएगा। रंजना की पहली संतान एक बेटी थी। बेटी ने जन्म के 17 दिन बाद ही दम तोड़ दिया था। उसके कुछ साल बाद गोलू का जन्म हुआ। बचपन से दिव्यांग होने के कारण गोलू मां पर ही निर्भर था।
गोलू के पिता विजय कुमार लोक निर्माण विभाग में बेलदार हैं। गोलू की सारी जिम्मेदारी अब गोलू के ताया और ताई पर आ गई है। गोलू कई बार ताई के साथ दुकान जाता था, लेकिन अधिकतर समय अपनी मां के साथ गुजारता था।
गौर हो कि बीते तीन नवंबर को 40 वर्ष की रंजना कुमारी पत्नी विजय कुमार घास काटने खेतों में जा रही थी। इस दौरान एक नाबालिग दुराचार करने के इरादे से महिला पर झपट पड़ा। जब महिला ने विरोध किया तो नाबालिग ने महिला पर दराती और डंडे से वार किए।
घायल अवस्था में महिला को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया था। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। नाबालिग के दिए गए घावों से महिला नहीं उभर पाई और उसने दम तोड़ दिया।
