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बिलासपुर, 6 नवम्बर। जिला बिलासपुर में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। मंगलवार को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) बिलासपुर परिसर में “व्यासप्योर कैंटीन” का शुभारंभ उपायुक्त राहुल कुमार ने किया। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन बिलासपुर और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर, खंड विकास अधिकारी बबीता धीमान, और आईटीआई के प्रधानाचार्य ओंकार सिंह भी उपस्थित रहे।
उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि “व्यासप्योर” अब बिलासपुर जिले में महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। आईटीआई परिसर में शुरू हुई यह नई कैंटीन जहां छात्रों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करवाएगी, वहीं यह महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा देगी। उन्होंने बताया कि “व्यासप्योर” ब्रांड का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को सशक्त पहचान दिलाना और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
उन्होंने कहा कि कैंटीन का संचालन स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की महिला सदस्यों को सौंपा गया है। इससे न केवल महिलाओं को सतत रोजगार मिलेगा बल्कि “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को भी बल मिलेगा।
राहुल कुमार ने बताया कि कैंटीन में “व्यासप्योर” ब्रांड के तहत तैयार आचार, पापड़, मसाले, बेकरी उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध रहेंगे। ये सभी उत्पाद बिलासपुर जिले के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा स्वच्छता, गुणवत्ता और स्वाद के उच्च मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर ने इस पहल को “वोकल फॉर लोकल” की भावना को साकार करने वाला कदम बताया और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
आईटीआई के प्रधानाचार्य ओंकार सिंह ने कैंटीन स्थापना के लिए जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम विद्यार्थियों को स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और उद्यमिता के प्रति प्रेरित करेगा। इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और जिला प्रशासन द्वारा “व्यासप्योर” ब्रांड के माध्यम से उनके उत्पादों को नई पहचान देने के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम, आईटीआई का स्टाफ और स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
