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ऊना, 30 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक जीएसटी इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने अंशुल धीमान नामक इस अधिकारी को सीधे तौर पर रिश्वत की राशि के साथ पकड़ा। यह घटना मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित जीएसटी कार्यालय में घटित हुई। अधिकारी पर एक स्थानीय व्यापारी से रिश्वत मांगने का आरोप है।
विजिलेंस विभाग के पुलिस अधीक्षक विरेंद्र कालिया ने इस मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार इंस्पेक्टर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग में तैनात था। यह कार्रवाई एक सप्लायर की शिकायत के बाद की गई। सप्लायर ने विजिलेंस को बताया कि इंस्पेक्टर ने उससे पैसे की मांग की थी।
मामला तब सामने आया जब एक एक्साइड बैटरी सप्लायर ने गलत रिटर्न दाखिल किया। इस सप्लायर ने करीब पांच से छह लाख रुपये का गलत रिटर्न फाइल किया था। जब इस गड़बड़ी का पता चला तो इंस्पेक्टर अंशुल धीमान ने सप्लायर से संपर्क किया। उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए पहले 1.50 लाख रुपये की मांग की।
बाद में लंबी बातचीत के बाद यह राशि 1.25 लाख रुपये तय हुई। सप्लायर ने तुरंत इसकी शिकायत विजिलेंस ब्यूरो से कर दी। विजिलेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक जाल बिछाने की योजना बनाई। टीम ने सप्लायर को रिश्वत की पहली किस्त देने के लिए तैयार किया।
मंगलवार को सप्लायर इंस्पेक्टर से मिलने जीएसटी कार्यालय पहुंचा। उसने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये देने का फैसला किया। जैसे ही इंस्पेक्टर ने रिश्वत की राशि ली, विजिलेंस टीम ने छापेमारी कर दी। डीएसपी फिरोज खान के नेतृत्व में यह टीम वहां मौजूद थी।
अधिकारियों ने इंस्पेक्टर को रिश्वत की रकम के साथ ही अपराध करते हुए पकड़ लिया। रिश्वत की पूरी राशि को तुरंत जब्त कर लिया गया। इस पूरे ऑपरेशन को बड़ी ही सूझ-बूझ के साथ अंजाम दिया गया। विभाग ने गिरफ्तारी से पहले सभी जरूरी सबूत जुटा लिए थे।
विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपी इंस्पेक्टर को हिरासत में ले लिया है। उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। एसपी विरेंद्र कालिया ने बताया कि जांच अभी जारी है। विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस अधिकारी ने पहले भी ऐसे किसी कार्य में लिप्त हो।
संभावना है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। विजिलेंस टीम अन्य संभावित अनियमितताओं का पता लगाने में जुटी हुई है। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रहा है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सरकारी विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर हैं। विजिलेंस ब्यूरो लगातार इस तरह की कार्रवाइयां कर रहा है। हिमाचल प्रदेश में यह पहली बार नहीं है जब किसी कर अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया हो।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार की कोशिश है कि प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे। आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस मामले ने जीएसटी विभाग में काम करने वाले अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। विभाग के अन्य अधिकारी भी इस घटना से सबक ले रहे हैं। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग और सख्त होगा।
