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शिमला, 19 अगस्त। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायाधीशों के लिए आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सरकार को बिना निचोड़े कुछ भी नहीं निकल रहा है।
सरकार के शपथपत्र पर कोर्ट की प्रतिक्रिया
कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर शपथपत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार यह समझाने का प्रयास कर रही है कि 13 आवास उपलब्ध करवाए गए हैं, जबकि वास्तव में केवल 12 आवासों का हवाला दिया गया है। एक आवास लोकायुक्त के कब्जे में बताया गया है। कोर्ट ने इस तरह की जानकारी को भ्रामक बताया।
कर्जन हाउस का वास्तविक उपयोग
कोर्ट ने बताया कि कर्जन हाउस, जिसे उच्च न्यायालय के पास आवंटन के लिए दिखाया गया है, का उपयोग वास्तव में अतिथि गृह के रूप में किया जा रहा है। इसका कारण यह है कि सरकार के पास अन्य राज्यों से आने वाले न्यायाधीशों के ठहरने के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं हैं।
सरकार की दलील को खारिज किया
सरकार की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि हाई कोर्ट द्वारा आवासों का उपयोग नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने उदाहरण दिया कि हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति को हार्विंगटन एस्टेट में रहने की अनुमति दी है क्योंकि सरकार आवास उपलब्ध नहीं करवा पाई।
कोर्ट ने दिए निर्देश
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह उपलब्ध आवासों में से हाई कोर्ट को विकल्प प्रदान करे। सरकार की ओर से दी गई सूची के अनुसार पांच न्यायाधीश अपने निजी आवासों में रह रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि उचित विकल्प दिया जाए तो न्यायाधीश सरकारी आवास चुन सकते हैं।
अगली सुनवाई की तारीख
मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रदान प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार अनेक मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का पालन न करने के कारण अवमानना मामलों का सामना कर रही है।
