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बिलासपुर : RTI के अंतर्गत सूचना देने में की देरी, आयोग ने पंचायत सचिव को लगाया जुर्माना, यहां जानें

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
बिलासपुर, 13 मई। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में RTI देरी का मामला सामने आया है। कौंडावाला बेहल पंचायत के सचिव गौरव कुमार पर राज्य सूचना आयोग ने 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 10 महीने की देरी के लिए की गई। रणजीत सिंह ने RTI के तहत जानकारी मांगी थी, जो देरी से दी गई।

RTI देरी की वजह

RTI देरी का मामला रणजीत सिंह के 5 फरवरी 2024 को दायर आवेदन से शुरू हुआ। उन्होंने दो बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। पंचायत सचिव गौरव कुमार ने 10 महीने तक सूचना खोजने का प्रयास नहीं किया। जानकारी एक अलमारी में रखी थी। सूचना आयोग के नोटिस के बाद ही जानकारी 3 मई 2025 को दी गई।

RTI देरी पर आयोग की कार्रवाई

RTI देरी पर राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। मुख्य सूचना आयुक्त आरडी धीमान ने गौरव कुमार पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग ने पाया कि सचिव ने सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन किया। यह जानकारी हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

आवेदन और अपील की प्रक्रिया

रणजीत सिंह ने 5 फरवरी 2024 को RTI आवेदन दायर किया। 27 मई 2024 को आंशिक जानकारी दी गई। असंतुष्ट होने पर उन्होंने पहली अपील दायर की। प्रथम अपीलीय प्राधिकरण ने 19 जून 2024 को शेष जानकारी देने का आदेश दिया। फिर भी पूरी जानकारी नहीं मिली। इसके बाद दूसरी अपील सूचना आयोग में दायर की गई।

सुनवाई के दौरान तथ्य

सुनवाई में अपीलकर्ता रणजीत सिंह अनुपस्थित रहे। प्रतिवादी गौरव कुमार ने बताया कि पूरी जानकारी 3 मई 2025 को दे दी गई। आयोग ने 10 महीने की देरी को गंभीर लापरवाही माना। गौरव ने कहा कि जानकारी अलमारी में थी, लेकिन पहले नहीं मिली। आयोग ने इसे RTI के प्रति उदासीनता माना।

जुर्माने का आदेश

राज्य सूचना आयोग ने गौरव कुमार को 20,000 रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया। यह जुर्माना सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत लगाया गया। आयोग ने पंचायत सचिव की लापरवाही और देरी के लिए कोई उचित स्पष्टीकरण न देने को गं personally माना।

लापरवाही का खुलासा

आयोग ने पाया कि गौरव कुमार ने रिकॉर्ड खोजने में कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। जानकारी पंचायत कार्यालय की अलमारी में थी, लेकिन 10 महीने तक इसे नहीं खोजा गया। सूचना आयोग के नोटिस के बाद ही जानकारी उपलब्ध कराई गई। यह RTI कार्य के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।

RTI अधिनियम का उल्लंघन

सूचना आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि गौरव कुमार ने RTI अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन किया। इस धारा के तहत समय पर जानकारी देना अनिवार्य है। देरी और लापरवाही के कारण आयोग ने दंडात्मक कार्रवाई की। यह फैसला अन्य अधिकारियों के लिए भी नजीर बनेगा।

जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश

आयोग ने गौरव कुमार को निर्दिष्ट मद में 20,000 रुपये की जुर्माना राशि जमा करने का आदेश दिया। यह राशि तय समय में जमा करनी होगी। आयोग का यह फैसला RTI के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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