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CBI Court: गुड़िया हत्याकांड में कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैंसला, 8 पुलिस कर्मी हत्या के दोषी करार, SP DW नेगी बरी

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित शिमला जिला के कोटखाई गुड़िया (16 वर्षीय छात्रा) दुष्कर्म और मर्डर मामले के आरोपी नेपाली युवक सूरज की लॉकअप में मौत मामले में सीबीआई कोर्ट चंडीगढ़ ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई कोर्ट ने शिमला के पूर्व आईजी जहूर जैदी सहित आठ पुलिस कर्मियों को हत्या का दोषी करार दिया है। फैसले के बाद अदालत ने सभी को हिरासत में लेने के आदेश जारी किए हैं। आरोपियों को अदालत 27 जनवरी को सजा सुनाएगी।

जहूर जैदी सहित यह पुलिस कर्मी दोषी

अदालत ने शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को बरी किया है। अदालत द्वारा आज जिन लोगों को दोषी करार दिया है, उनमें शिमला के पूर्व आईजी जहूर जैदी के अलावा ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, ऑनरेरी हेड कॉन्स्टेबल मोहन लाल, ऑनरेरी हेड कॉन्स्टेबल सूरत सिंह, हेड कॉन्स्टेबल रफी मोहम्मद और कॉन्स्टेबल रानित सटेटा पर आरोप साबित हुए है। दोषियों को 27 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।

2017 में छात्रा के साथ दुष्कर्म और मर्डर 

बता दे साल 2017 में शिमला जिला के कोटखाई क्षेत्र में एक 16 साल की छात्रा के साथ जंगल में दुष्कर्म हुआ था। दुष्कर्म के बाद आरोपी ने उसकी हत्या कर दी थी। यह घटना 4 जुलाई 2017 को उस समय हुई थी, जब छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। यह छात्रा दो दिन लापता रही और दो दिन बाद 6 जुलाई को छात्रा का निर्वस्त्र शव जंगल से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी। 

आईजी जहूर जैदीकी अध्यक्षता में बनाई थी कमेटी

इस मामले की जांच के लिए हिमाचल पुलिस ने तत्कालीन आईजी जहूर जैदी की अगवाई में एक एसआईटी का गठन किया था। टीम ने छह संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया था, जिसमें एक नेपाली मूल का युवक सूरज भी शामिल था। 18 जुलाई 2017 को कोटखाई थाना में सूरज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

सीबीआई जांच में पुलिस कर्मी पाए गए थे दोषी

सूरज की मौत के बाद पूरे हिमाचल में जनआक्रोश देखने को मिला था। लोगों ने पुलिस की बर्बरता पर गंभीर आरोप लगाए थे और न्याय की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरज की मौत पुलिस हिरासत में टॉर्चर के कारण हुई थी। इस मामले को लेकर चंडीगढ़ की सीबीआई विशेष अदालत में सुनवाई चली। अदालत ने अंतिम बहस सुनने के बाद पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी समेत आठ पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया।

कांग्रेस सरकार ने जहूर जैदी को दी थी तैनाती

सीबीआई ने अगस्त 2017 में पूर्व आईजी जहूर जैदी को सूरज की मौत के मामले में गिरफ्तार किया था। जैदी 582 दिनों तक शिमला के कंडा जेल में रहे। अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। जमानत के बाद भी उनके खिलाफ ट्रायल जारी रहा। जनवरी 2020 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। तीन साल के निलंबन के बाद जनवरी 2023 में कांग्रेस सरकार ने उनकी सेवाएं बहाल कर दीं। सितंबर 2023 में उन्हें पुलिस विभाग में तैनाती दी गई थी। अदालत के फैसले के बाद दोषियों के लिए सजा का ऐलान 27 जनवरी को होगा।

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