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शिमला, 07 सितम्बर। हाईकोर्ट ने राज्य में नकली दवाइयों के निर्माण, नकली पहचान पत्र के इस्तेमाल और करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने अनमोल सिंह राणा द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। मामले के अनुसार कम्पनी के निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने 275 किलोग्राम नकली दवा 'एक्सपोलटैब' का बिक्री रिकॉर्ड छुपाया और बिना वैध लाइसैंस के भारी मात्रा में फर्जी दवाइयां बनाईं। यह ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट 1940 का सीधा उल्लंघन है। ड्रग विभाग ने जुलाई 2023 में ही इनका थोक दवा लाइसैंस रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद नालागढ़ की अदालत ने जनवरी 2024 में इन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया था। जून 2026 में दायर एक प्रतिनिधित्व के अनुसार इस पूरे खेल में 27 से 28 टन फार्मास्युटिकल सामग्री (रॉ मैटीरियल) की अवैध सप्लाई, धोखाधड़ी और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की बात सामने आई है। इसमें अवैध तरीके से कमाए गए काले धन की जांच बेहद जरूरी है।
राज्य के स्टेट विजीलैंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को पत्र लिखकर इस मामले की जांच में अपनी लाचारी व्यक्त की थी। विजीलैंस का कहना है कि उनके पास जनशक्ति (मैन पावर), संसाधनों और राजस्व विभाग के कामकाज के डोमेन ज्ञान की कमी है, जिससे वे इतनी जटिल वित्तीय हेराफेरी की जांच नहीं कर सकते। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जल्द जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अन्य आरोपियों को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 7 अक्तूबर के लिए तय की है।
