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बिलासपुर, 30 अगस्त। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बिलासपुर यूनिट की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बंदला जैसे संवेदनशील और पहाड़ी रूटों पर तय किलोमीटर पूरा कर चुकी पुरानी बसों को भेजे जाने से यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आरोप है कि यूनिट प्रबंधन द्वारा ऐसी बसों को इन रूटों पर लगाया जा रहा है, जो अपनी निर्धारित परिचालन सीमा पूरी कर चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार बिलासपुर से ब्रह्मपुखर वाया बंदला और वापस बिलासपुर तक का रूट करीब 52 किलोमीटर का है। इस रूट पर सायं करीब 5:30 बजे बस रवाना होती है। बंदला क्षेत्र का मार्ग पहाड़ी और संवेदनशील होने के कारण बसों की तकनीकी स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बताया जा रहा है कि इस रूट पर ऐसी बसें भी भेजी जा रही हैं, जो निगम की निर्धारित नीति के अनुसार अपना किलोमीटर पूरा कर चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार 13 लाख से लेकर 15 लाख किलोमीटर तक चल चुकी बसों को भी बंदला जैसे रूटों पर लगाया जा रहा है। इतनी अधिक दूरी तय कर चुकी बसों को संवेदनशील पहाड़ी मार्ग पर दौड़ाने से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रास्ते में दम तोड़ देती हैं पुरानी बसें
पुरानी और अत्यधिक किलोमीटर चल चुकी बसों के रूट पर भेजे जाने का असर कई बार यात्रियों को भुगतना पड़ता है। बसों में तकनीकी खराबी आने या रास्ते में बस बंद हो जाने से यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर शाम के समय बस खराब होने पर ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों के लिए समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदला जैसे पहाड़ी रूट पर बस की फिटनेस और तकनीकी स्थिति के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। यदि निगम के पास बेहतर स्थिति वाली बसें उपलब्ध हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ऐसे संवेदनशील रूटों पर लगाया जाना चाहिए।
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो कर्मचारी या अधिकारी किलोमीटर पूरा कर चुकी बसों को ऐसे संवेदनशील रूटों पर भेज रहे हैं, क्या उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त तकनीकी जांच और जोखिम का आकलन किया है?
यदि भविष्य में ऐसी किसी बस में तकनीकी खराबी के कारण कोई गंभीर हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या बस आवंटित करने वाले अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
यात्रियों और स्थानीय लोगों ने HRTC के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बंदला-ब्रह्मपुखर रूट पर संचालित बसों की फिटनेस, किलोमीटर और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच करवाई जाए तथा निर्धारित सीमा पूरी कर चुकी बसों को संवेदनशील पहाड़ी रूटों से हटाया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि इतनी अधिक किलोमीटर चल चुकी बसों को किन नियमों के तहत इन रूटों पर भेजा जा रहा है।
