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बिलासपुर, 23 जून। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय को बंद करने के निर्णय के विरोध में क्षेत्र के लोगों ने आवाज बुलंद कर दी है। डाकघर शिकरोहा, तहसील सदर, जिला बिलासपुर निवासी रजनीश शर्मा ने शिक्षा सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजकर इस निर्णय को तुरंत वापस लेने तथा महाविद्यालय में रिक्त पदों को भरने और स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं शुरू करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि लगभग 34 बीघा भूमि पर स्थापित जुखाला महाविद्यालय क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से भवन और आधारभूत ढांचा विकसित किया गया है। महाविद्यालय में प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, सौर ऊर्जा संयंत्र सहित कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। वर्तमान में तीन विधानसभा क्षेत्रों और तीन जिला परिषद वार्डों के 200 से अधिक विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश छात्राएं हैं।
ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय को बंद करने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित होना पड़ेगा। इससे उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों पर निर्भर होना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां बढ़ेंगी।
रजनीश शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय ने वर्षों से शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है तथा कई विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया है। ऐसे में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय को बंद करना जनहित और नई शिक्षा नीति (NEP) की भावना के विपरीत है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि महाविद्यालय में गणित, अर्थशास्त्र, भूगोल और वनस्पति विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के अध्यापकों के कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इन पदों को शीघ्र भरने की भी मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त महाविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं आरंभ करने, प्रस्तावित बहुउद्देशीय इंडोर ऑडिटोरियम का निर्माण करवाने तथा खेल मैदान एवं अन्य अधूरी शैक्षणिक सुविधाओं के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने इस जनहित से जुड़े मुद्दे पर पुनर्विचार नहीं किया तो क्षेत्र की जनता, विद्यार्थी, अभिभावक और सामाजिक संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर के साथ रजनीश शर्मा की लंबी वार्ता हुई। बातचीत के दौरान शिक्षा सचिव ने बताया कि इस विषय पर दिए गए सुझावों को विभाग गंभीरता से मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगा और निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री जी छात्रों और अभिभावकों के हित में निर्णय लेंगे।
