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हिमाचल: BDO पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर, CM सुक्खू के दरबार पहुँचा मामला

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
मंडी, 24 जून। सराज विधानसभा क्षेत्र के बालीचौकी विकास खंड में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठा विवाद अब मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गया है। पूर्व जिला परिषद सदस्य संत राम ने शिमला में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विकास खंड अधिकारी भवनेश चड्ढा के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा है। इस शिकायत पत्र में अधिकारी पर पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन की कथित बर्बादी और नियमों की अनदेखी कर मनमाने निर्णय लेने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संत राम ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से समयबद्ध जांच करवाने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मुख्यालय की बजाय करीब 33 किलोमीटर दूर रखा निवास
ज्ञापन में मुख्य रूप से अधिकारी के निवास स्थान और उसके कारण हो रहे खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि बीडीओ ने अपना आधिकारिक निवास बालीचौकी मुख्यालय की बजाय करीब 33 किलोमीटर दूर कलैहली में रखा हुआ है। इसके कारण कार्यालय का दैनिक संचालन तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही अधिकारी के रोजाना आवागमन के लिए सरकारी वाहन के कई चक्कर लगते हैं, जिससे सरकारी धन और ईंधन की अनावश्यक बर्बादी हो रही है।

वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र करते हुए शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियमों को ताक पर रखकर एक निजी फर्म से लगभग 50 हजार रुपए प्रति यार्ड की दर से बड़ी संख्या में सैग्रीगेशन यार्ड खरीदे गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस फर्म का संबंध विकास खंड के ही एक ग्राम रोजगार सेवक से है, जो सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है। इतना ही नहीं, लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अधिकांश पंचायतों में ये यार्ड आज तक उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं और बेकार पड़े हैं।

ज्ञापन में एक और गंभीर मुद्दा पंचायत निधियों के प्रबंधन से जुड़ा उठाया गया है। आरोप है कि पंचायतों की करोड़ों रुपए की सरकारी धनराशि को स्थानीय ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों से हटाकर कुल्लू जिले के भुंतर स्थित एक निजी बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया है। संत राम ने इस पूरे वित्तीय लेन-देन को बेहद संदिग्ध बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा, शिकायत में हरियाली परियोजना के तहत सामग्री खरीद में निर्धारित प्रक्रियाओं के उल्लंघन और 29 जुलाई, 2025 के सरकारी आदेशों की कथित गलत व्याख्या कर मनरेगा मजदूरों को उनके रोजगार से वंचित करने के आरोप भी शामिल हैं।
 
दूसरी तरफ, बालीचौकी के बीडीओ भवनेश चड्ढा ने अपने ऊपर लगाए गए इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन करार दिया है। उनका कहना है कि विकास खंड में सभी कार्य निर्धारित सरकारी नियमों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के तहत ही किए जा रहे हैं। चड्ढा ने पलटवार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं पहले पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों में संलिप्त पाया गया है और अब वह झूठी शिकायतें कर अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। बीडीओ ने स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर जांच होती है, तो विभाग पूरा सहयोग करेगा और सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अपनी छवि धूमिल करने और मनगढ़ंत आरोप लगाने को लेकर वह शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानि का मुकद्दमा दर्ज करेंगे।

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