न्यूज अपडेट्स
बिलासपुर, 03 जून। जिला बिलासपुर में जनगणना-2027 अभियान का औपचारिक शुभारंभ आज उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर, सहायक आयुक्त राजकुमार तथा जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर उपायुक्त राहुल कुमार ने जिला वासियों से भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन संचालित जनगणना-2027 अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि नागरिक 01 जून से 15 जून, 2026 तक उपलब्ध स्वगणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) सुविधा का लाभ उठाकर अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने स्वयं भी स्वगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
उपायुक्त ने बताया कि स्वगणना के लिए नागरिक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। यह सुविधा सीमित अवधि के लिए उपलब्ध है और इसके माध्यम से नागरिक बिना किसी मध्यस्थ के अपना संपूर्ण विवरण डिजिटल रूप से दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वगणना से जनगणना प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी तथा आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी।
राहुल कुमार ने कहा कि जनगणना-2027 देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित की जा रही है। यह केवल जनसंख्या की गणना का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं, नीतियों और संसाधनों के वैज्ञानिक नियोजन का आधार भी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही सरकार को क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं का सटीक आकलन करने में सक्षम बनाती है।
उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं आवासीय गणना का कार्य 16 जून से 15 जुलाई, 2026 तक किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना होगी।
उपायुक्त ने बताया कि स्वगणना अवधि समाप्त होने के उपरांत प्रगणक एवं पर्यवेक्षक घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन और संग्रहण करेंगे। जिला बिलासपुर में इस कार्य के लिए लगभग 1130 प्रगणकों की तैनाती की गई है, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर जनगणना संबंधी आंकड़े एकत्र करेंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से जनगणना कर्मियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।
उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही भविष्य की विकास योजनाओं का आधार बनती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, आवास, सामाजिक सुरक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधनों का आवंटन जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह स्वगणना अथवा प्रगणकों को जानकारी देते समय सही तथ्य उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि सही आंकड़ों से सरकार को क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करने में सहायता मिलती है, जिससे विकास कार्यों की बेहतर योजना बनाई जा सकती है और योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने भी जिला वासियों, पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों से 15 जून से पूर्व स्वगणना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 16 जून के बाद जब प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, तब उनके पास भारत सरकार द्वारा जारी अधिकृत पहचान पत्र होगा। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर उनकी पहचान की पुष्टि कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी व्यक्ति को पहचान सत्यापित किए बिना व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान कोई भी प्रगणक या सरकारी कर्मचारी किसी नागरिक से बैंक खाते का विवरण, एटीएम कार्ड नंबर, पासवर्ड, ओटीपी अथवा अन्य वित्तीय जानकारी नहीं मांगेगा। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस अथवा जिला प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता और सतर्कता के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी की संभावनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
