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शिमला, 15 जनवरी। बाहरी राज्यों के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों पर विवादित बयान के बाद सुक्खू सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए।
वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता जैसे एनएचएआई के अधिकारियों का किया। बता दें कि विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की ऐसा कुछ नहीं है कि प्रतिक्रिया आई। इसके बाद अब अनिरुद्ध ने कहा तो विक्रमादित्य ने उनके पुराने विवाद पर घेरने का प्रयास किया।
उधर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह चारों तरफ घिर गए हैं। आईएएस और आईपीएस अफसर भी विरोध में उतर आए हैं। बुधवार को पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विक्रमादित्य सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयानों से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहर से हैं। उन्होंने यह तक कह दिया कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ के तौर पर काम करते हैं। वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। साल 2016 के बाद तो प्रदेश में नए आईएएस अधिकारी भी नहीं आए हैं। यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनते हैं। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी बाहरी राज्यों में काम कर रहे हैं।
वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मंत्री जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह तजुर्बे, रुतबे और उम्र में उनसे बड़े हैं। मैं, उनका सम्मान करता हूं। साथ ही अधिकारियों का भी। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि, मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा घायल एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ था। अपने फेसबुक अकाउंट पर वीडियो जारी कर विक्रमादित्य सिंह ने कहा- मैं जो कहता हूं, वह साफ शब्दों में कहता हूं। हिमाचल प्रदेश के लिए अगर मुझे किसी के सामने बुरा भी बनना पड़े तो मैं तैयार हूं। उप मुख्यमंत्री ने जो बात कही, उन्होंने तो उसे सेकंड किया है।
