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शिमला, 16 दिसंबर। पर्यटन राज्य होने के चलते हिमाचल पर कई तरह के बोझ भी हैं। इसमें सबसे अहम है- कचरा, जो या तो स्थानीय लोग फैलाते है या फिर दूसरे राज्यों से आए पर्यटक। प्रदेश में कचरा प्रबंधन एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर इस ओर निरंतर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसी कड़ी में सरकार ने एक अहम योजना चला रखी है जो प्लास्टिक के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।
प्लास्टिक जमा करवाने पर मिलेंगे पैसे
सुक्खू सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना के तहत लोगों को प्लास्टिक को जमा करवाने पर पैसे मिलेंगे। प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए कितना खराब है, ये जगजाहिर है, ऐसे में अगर ऐसी कोई योजना है जो प्लास्टिक जमा करवाने पर पैसे देती है तो ये कमाल का आइडिया है।
प्लास्टिक देने पर कैसे मिलेंगे पैसे ?
पैसे तो मिलेंगे लेकिन ये मिलेंगे कैसे- इसका जवाब कुछ इस तरह है-
मान लीजिए आप किसी दुकान से प्लास्टिक या कांच की कोई चीज लेते हैं
तो आपको उस आइ़टम की कीमत के साथ कुछ एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा
दुकानदार आपसे से ये चार्ज QR कोड स्कैनिंग के जरिए लेगा
प्लास्टिक या कांच को कलेक्शन सेंटर पर जमा करने के बाद आपको ये पैसा वापस मिल जाएगा
इन चीजों की वापसी पर मिलेंगे पैसे
योजना के तहत चिप्स, कुरकुरे, पानी इत्यादि पर वसूला गया चार्ज रिफंडेबल है। इसके लिए सरकार ने कुछ स्थानों पर क्लेक्शन सेंटर खोले रखे हैं। इनमें चिप्स, कुरकुरे, प्लास्टिक कांच व एल्यूमीनियम के खाली डिब्बे-बोतल इत्यादि वापस करने पर टैक्स की राशि लोगों को लौटा दी जाएगी।
हिमाचल सरकार की इस योजना का नाम है- डिपॉजिट रिफंड स्कीम 2025 जो हिमाचल के पर्यावरण को बचाने की एक बड़ी कोशिश है। सब जानते हैं कि प्लास्टिक और पॉलिथीन हमारे पहाड़ों के लिए कितनी बड़ी समस्या है। इस योजना से लोगों की आदतों को बदलने की कोशिश की जा रही है।
इस योजना के जरिए सफाई की जिम्मेदारी पर्यटक और दुकानदार दोनों को लेनी होगी। इसे सबसे पहले उन जगहों पर शुरू किया गया जहां बहुत ज्यादा लोग आते हैं। अब ये वक्त बतायेगा कि ये योजना कचरा प्रबंधन और प्रदूषण की समस्या को दूर करने में कितनी मददगार साबित होती है।
